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डॉक्टर-इंजीनियर जैसे पढ़े-लिखे लोग बन रहे साइबर ठगी का शिकार, IIT मद्रास की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Published: Tue, 29 Sep 2026 08:25 PM (IST)

आईआईटी मद्रास के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में अत्यधिक शिक्षित पेशेवर जैसे डॉक्टर और इंजीनियर भी साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।

डॉक्टर, इंजीनियर, बैंककर्मी जैसे लोग भी साइबर ठगों के जाल में।

डॉक्टर, इंजीनियर, बैंककर्मी जैसे लोग भी साइबर ठगों के जाल में।

HighLights

  1. आईआईटी मद्रास अध्ययन: शिक्षित पेशेवर साइबर ठगी के शिकार।

  2. डॉक्टर, इंजीनियर, बैंककर्मी जैसे लोग भी ठगों के जाल में।

  3. तनावपूर्ण स्थितियों में ठग बनाते हैं निशाना, वित्तीय नुकसान।

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। आइआइटी मद्रास के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में सामने आया है कि देश में साइबर ठगी के शिकार लोगों में बड़ी संख्या अत्यधिक शिक्षित और पेशेवर लोगों की है।

इस सूची में शामिल पेशेवर लोगों में डाक्टर, इंजीनियर, बैंककर्मी, अध्यापक, प्रबंधन एवं वित्त विशेषज्ञ, सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारी, आइटी पेशेवर और साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त लोग शामिल थे।

अध्ययन में कहा गया कि ये सभी डिजिटली काफी जागरुक हैं, लेकिन इसके बावजूद वो साइबर अपराधियों के बिछाए जाल में आसानी से फंस जाते हैं। साइबर ठग इन पढ़े-लिखे लोगों को ठगने के लिए काफी आम तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसमें फर्जी कानूनी नोटिस, डिजिटल अरेस्ट और पुलिस अधिकारी बनकर धमकाने जैसे मामले सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा घर बैठे कमाई के झूठे वादे करके लालच दिया जाता है और फिर बैंक खाते पर हाथ साफ हो जाता है।

कुछ लोग फर्जी एप और एपीके फाइल्स का शिकार भी होते हैं। अध्ययन के अनुसार, उच्च डिजिटल साक्षरता भी व्यक्ति को साइबर धोखाधड़ी से पूरी तरह सुरक्षित नहीं रखती।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जालसाज अक्सर लोगों को तनाव या जीवन में बदलाव के दौर में निशाना बनाते हैं। परिवार में बीमारी, सेवानिवृत्ति, नौकरी की तलाश और कार्यस्थल का दबाव ऐसे हालात रहे, जिनका अपराधियों ने फायदा उठाया।

डर, आर्थिक लाभ की उम्मीद और प्रतिष्ठा संबंधी चिंताओं के जरिए पीड़ितों की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित की गई। पीड़ितों को कुछ हजार रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये से अधिक तक का नुकसान हुआ। कई लोगों ने शर्मिंदगी, अनिद्रा, अवसाद और पारिवारिक विश्वास में कमी की भी जानकारी दी।

अध्ययन 33 पीड़ितों के साक्षात्कार पर आधारित था, जिनमें 22 पुरुषों और 11 महिलाएं थीं, उसमें भी 12 वरिष्ठ नागरिक थे। ये साक्षात्कार चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, नई दिल्ली और मुंबई में अंग्रेजी, हिंदी और तमिल में किए गए।

शोधकर्ताओं ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए पीड़ितों को दोष देने के बजाय बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों में त्वरित पहचान, हस्तक्षेप और बेहतर समन्वय की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।

सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार