नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जहां लोगों को साफ पानी नसीब नहीं है। कई जगहों पर तो भूगर्भ जल और साफ पानी की स्थिति खराब ही होती जा रही है। इसी तरह, कई स्थानों पर पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड और लेड जैसे तत्वों की अधिकता है, जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक हैं। इनकी वजह से कई तरह की बीमारियां हो रही हैं। समस्याएं इसलिए और बढ़ जाती हैं, क्योंकि आम आदमी इस बात को नहीं जान पाता है कि उसके पास उपलब्ध पानी में किस तरह की समस्या है। ऐसे में वह दूषित जल का उपयोग तब तक करता रहता है, जब तक कि उसे कोई तकलीफ न महसूस हो। आईआईटी कानपुर ने इसी समस्या का हल तलाशा है।

आईआईटी कानपुर में इन्क्यूबेटेड, स्टार्ट-अप अर्थफेस एनालिटिक्स प्रा० लिमिटेड और कृत्स्नम टेक्नोलॉजीज प्रा० लिमिटेड ने स्मार्टफोन तकनीक के आधार पर कलरमीट्रिक टेस्ट-स्ट्रिप का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता का विश्लेषण और निगरानी के लिए एक उपकरण विकसित किया है। आईआईटी कानपुर के पृथ्वी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ इंद्र सेन द्वारा बनाई गई इस डिवाइस में 2 मिनट से भी कम समय में पानी की क्वालिटी जांची जा सकेगी। प्रोफेसर सेन ने बताया कि हम पानी के रंग के आधार पर उसकी गुणवत्ता का आकलन करेंगे। इसमें रंग के 14 मानक होंगे, जिनके आधार पर पानी में मौजूद तत्वों के बारे में हम जान पाएंगे। वर्तमान आविष्कार पानी की गुणवत्ता की निगरानी में आने वाली तमाम चुनौतियों का समाधान करेगा। इसमें स्मार्ट-फोन आधारित कलरमेट्रिक परीक्षण-पट्टी का उपयोग किया जाता है, जो कई महत्वपूर्ण जल गुणवत्ता मानकों को तुरंत स्क्रीन करता है।

प्रोफेसर सेन ने कहा कि इस डिवाइस का फायदा यह है कि कोई भी व्यक्ति अपने घर में कम कीमत पर पानी की जांच कर सकेगा। इसके लिए उसे एप में पद्मावती एप इंस्टाल करने की जरूरत पड़ेगी। सेन ने बताया कि अमूमन पानी की जांच के लिए टीडीएस को ही सबसे बड़ा पैमाना लोग मान लेते हैं, जो कि सही नहीं है। कंपनियां या पानी जांचने वाले टीडीएस के आधार पर ही लोगों को पानी की गुणवत्ता बताते हैं, पर टीडीएस में यह जानकारी नहीं होती है कि उनके घर के पानी में किस तत्व की अधिकता है और किसकी वजह से पानी खराब है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति तत्वों की अलग-अलग जांच कराएगा, तो काफी वक्त लग जाएगा। ऐसे में पद्मावती पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए बेहतर डिवाइस है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त आविष्कार के लिए स्टार्ट-अप द्वारा एक सहयोगी भारतीय पेटेंट आवेदन फाइल किया गया है।

कैसे जांचेगा पानी

वैज्ञानिकों के मुताबिक इसमें एक वेसल है, जिसमें पानी स्टोर किया जाता है। वेसल में ऐसा सिस्टम बना है, जिससे पानी अंदर व बाहर जा सकता है। पानी को फिर एक सॉरबेंट के संपर्क में लाया जाता है। सॉरबेंट एक ऐसा सब्सटेंस है, जो पानी के बायोलॉजिकल व केमिकल एनालिट्स या मॉलीक्यूल्स को एब्जार्व करता है। इस प्रक्रिया से पानी पूरी तरह शुद्ध हो जाता है। इसे बाहर निकाल लिया जाता है, मगर सॉरबेंट को अंदर छोड़ दिया जाता है। फिर उसमें एक सॉल्यूशन डाला जाता है, जो यह बताता है कि पानी में क्या-क्या मिला था। इससे पानी की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जा सकती है। 

Posted By: Vineet Sharan

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