रुमनी घोष, नई दिल्ली। भारत की पुरातात्विक विरासत के माध्यम से स्वावलंबन और आर्थिक समृद्धि को सशक्त करने के लिए अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) हैदराबाद आगे आया है। आइआइटी हैदराबाद ने सांस्कृतिक विविधता से भरे देश की विरासत को इकोसिस्टम को नवजीवन देने के लिए तकनीकी रूप से दक्ष विशेषज्ञ तैयार करने का जिम्मा लिया है। संस्थान ने एक बड़ी पहल करते हुए विरासत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (हैरिटेज साइंस एंड टेक्नोलाजी) नाम से नया पाठ्यक्रम आरंभ किया है।

हजारों लोगों की आर्थिकी होगी सशक्त: देश के कोने-कोने में सांस्कृतिक, धार्मिक और कला के क्षेत्र में गौरवमयी विरासत है। इनके इर्द-गिर्द हजारों लोगों की आजीविका भी फल-फूल रही है। अब यह नया कोर्स विज्ञान और तकनीक के प्रयोग से इन विरासतों के आसपास के औद्योगिक परिदृश्य को नया कलेवर प्रदान करेगा।

अगस्त से शुरू होगा कोर्स: इस दो वर्षीय पाठ्यक्रम में विद्यार्थी एमटेक कर पाएंगे। अगस्त 2022 से शुरू होने वाला पाठ्यक्रम आनलाइन होगा। इसमें तीन विषय योग विज्ञान, प्रौद्योगिकी, भारतीय भाषा प्रसंस्करण, और वास्तुकला का संरक्षण व पुनर्निर्माण शामिल हैं। एचएसटी पाठ्यक्रम की विशेषता यह है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रविधान की तरह इस कोर्स के छात्र अपनी सुविधा के हिसाब से कोर्स बीच में छोड़कर प्रमाणपत्र हासिल कर सकते हैं। इसमें एक साल का स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडी) प्रमाणपत्र लेकर विद्यार्थी अलग हो सकते हैैं। एचएसटी विभाग प्रमुख डा. मोहन राघवन के अनुसार भारतीय विरासत, स्मारक, पुरातात्विक स्थल, भाषा, पोशाक, ज्ञान प्रणाली और स्वदेशी प्रौद्योगिकियां सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी मानवता के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इनमें दबे और छिपे हुए बहुमूल्य इतिहास को बाहर आना चाहिए। साथ ही, इनके आसपास पनप रहे और प्राचीन भारतीय परंपराओं को सहेजती कलाओं से जुड़े व्यापारों-उद्योगों को भी विज्ञान और तकनीक का आधार मिलना चाहिए।

विरासत संभालने को आगे आ रहीं आइआइटी

आइआइटी बीएचयू: संस्कृत को व्यवहार रूप में कंप्यूटर की भाषा के रूप में बदलने की पहल

आइआइटी इंदौर: क्लासिकल साइंटिफिक विषयों को पढऩे के लिए पाठ्यक्रम। पहले हिस्से में जो संस्कृत नहीं जानते, उनमें संस्कृत में बात करने का कौशल विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम के दूसरे भाग का उद्देश्य छात्रों में संस्कृत भाषा में तकनीकी विषयों को समझने की योग्यता विकसित करना है।

आइआइटी बांबे: संंस्कृति मंत्रालय के साथ हुए अनुबंध के अंतर्गत नेशनल वर्चुअल लाइब्रेरी आफ इंडिया परियोजना शुरू की है। इसमें भारतीय संस्कृति पोर्टल में भारतीय ज्ञान, कला, संस्कृति और इतिहास को डिजिटाइज किया जा रहा है।

आइआइटी खडग़पुर: संस्कृत को सुलभ बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) प्रणाली विकसित करने पर कार्य हो रहा है।

ऐसा है विरासत में विज्ञान का वैश्विक परिदृश्य

3000

से ज्यादा विरासत विज्ञानी सक्रिय हैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

2006

से तेजी से चलन बढ़ा हैरिटेज साइंस यानी विरासत विज्ञान का विश्व में

2010

में यूनिवर्सिटी कालेज लंदन और क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट में विरासत विज्ञान में स्नातकोत्तर का पाठ्यक्रम शुरू हुआ

2013 से इस विषय को विश्व में एक स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में सामूहिक मान्यता मिली

2014 में आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्राइटन विश्वविद्यालय में कला, विरासत और पुरातत्व में विज्ञान और इंजीनियरिंग में डाक्टरेट प्रशिक्षण केंद्र की स्थाना हुई

2017 में यूरोपीय आयोग ने हैरिटेज साइंस यूरोपीय अनुसंधान अवसंरचना परियोजना के प्रारंभिक चरण को वित्त पोषित किया

वर्ष 2022 में ईआरआइसी अगले चरण में अपने विस्तार पर काम कर रहा है

Edited By: Sanjay Pokhriyal