नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। देश के शोध संस्थान और वैज्ञानिक अब लॉकडाउन के बाद की स्थिति पर भी काम कर रहे हैं। इन शोधों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि कैसे देश की अर्थव्यवस्था का पहिया चलता रहे और साथ ही लोग बीमार भी न हों। इसके लिए सबसे जरूरी है- बचाव, रोकथाम, नियमों का पालन और सचेत रहना।

इसी क्रम में आईआईटी गुवाहटी के वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस का निर्माण किया है, जो कोरोना से बचाव में काफी कारगर होगी। आईआईटी गुवाहटी के वैज्ञानिकों ने कम कीमत वाला यूवीसी लाइट आधारित डिसइंफेक्टेंट बॉक्स का निर्माण किया है। इसकी मदद से आप ग्लब्स, मास्क आदि को फेंकने से पहले संक्रमणमुक्त कर सकते हैं। इसकी मदद से हम फ्लोर को भी डिसइंफेक्ट कर सकते हैं।

आईआईटी गुवाहटी के सेंटर फॉर एनर्जी के शिक्षक प्रोफेसर हर्ष चतुर्वेदी ने बताया कि हमने एक यूवीसी लाइट आधारित कम कीमत वाली एक डिवाइस बनाई है। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसा होता है कि हम मास्क, दस्ताने या मेडिकल एसिसरीज का प्रयोग करने के बाद उन्हें ऐसे ही फेंक देते हैं। फेंकने के पहले उन्हें हम संक्रमणमुक्त नहीं करते हैं। ऐसा करना बेहद जरूरी है। संक्रमणमुक्त न करने की वजह से इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए इस डिवाइस के द्वारा इन्हें फेंकने से पहले संक्रमणमुक्त कर सकते हैं। इसकी मदद से मेडिकल एसेसरीज के साथ-साथ कमरे और फ्लोर को भी सेनिटाइज किया जा सकता है।

इसके अलावा, इसे अस्पताल, सार्वजनिक जगहों, घर के सामान और डिस्पोजेबल वेस्ट को संक्रमणमुक्त करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इस डिवाइस को प्रोफेसर हर्ष चतुर्वेदी के साथ मिलकर पीएचडी छात्रा प्रिया देवी ने बनाया है। यूवीसी बॉक्स को मणिपुर के सरकारी दफ्तरों में डोनेट किया गया है।

प्रोफेसर चतुर्वेदी ने बताया कि टीम प्रोपिलिस ग्रुप, पुणे के साथ मिलकर यूवीसी डिसइंफेक्टेंट डिवाइस की कमर्शियल मैनुफैक्चरिंग पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि इसकी कीमत दो हजार रुपये है। इस डिवाइस के बारे में प्रापिलिस के निदेशक आशुतोष मुगलिकर ने कहा कि आईआईटी गुवाहटी द्वारा बनाया गया यह उत्पाद काफी बढ़िया है। इसकी मदद से आप घर के सामान के साथ-साथ बाहर की जगहों को भी संक्रमण से मुक्त कर सकते हैं। हम इस तकनीक के व्यवसायीकरण पर काम कर रहे हैं।

आईआईटी गुवाहटी ने बनाया है मास्क

आईआईटी- गुवाहटी के डिजाइन डिपॉर्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ चारू मोंगा ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले मास्क का निर्माण किया है। इस कम कीमत वाले मास्क को सिर्फ फिल्टर बदलकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मास्क को डॉ चारू मोंगा ने हर्ष चतुर्वेदी के साथ मिलकर तैयार किया है। इसकी सैंपल मैन्युफैक्चिरंग ग्लोबल प्लास्टिक के द्वारा की गई है।

लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है ग्रुप

आईआईटी गुवाहटी के सेंटर फॉर एनर्जी के शिक्षक प्रोफेसर हर्ष चतुर्वेदी और डिपॉर्टमेंट ऑफ डिजाइन की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ चारू मोंगा ने स्मॉर्ट डिविजन आईएनसी के निदेशक शशांका अशीली ने 'साइंटिस्ट बियांड बॉर्डर' ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप में भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूके, फ्रांस और अमेरिका के इंजीनियर, एंटरप्रेन्योर, साइंटिस्ट, शोधकर्ता और दुनिया भर के फैकल्टी आदि शामिल हैं। यह ग्रुप डाटा को एकत्रित करना, प्रसार करना और लोगों में जागरूकता पैदा करने का काम करता है।  

Posted By: Vineet Sharan

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