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प्रकाश आंबेडकर के पुत्र सुजात के नेतृत्व में आज भी IIT गेट पर हुआ प्रदर्शन, छुट्टी पर भेजे गए प्रोफेसर डूला

Published: Wed, 23 Sep 2026 08:31 PM (IST)

आईआईटी मुंबई के छात्र साहिल वाकोडे की मौत पर सुजात आंबेडकर के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी रहा, जिसमें निष्पक्ष जांच ...और पढ़ें

सुजात आंबेडकर के नेतृत्व में आईआईटी गेट पर प्रदर्शन जारी

सुजात आंबेडकर के नेतृत्व में आईआईटी गेट पर प्रदर्शन जारी

HighLights

  1. सुजात आंबेडकर के नेतृत्व में आईआईटी गेट पर प्रदर्शन जारी।

  2. प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को जांच के लिए छुट्टी पर भेजा गया।

  3. मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही साहिल की मौत की निष्पक्ष जांच।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। आईआईटी मुंबई के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की मौत को लेकर आज भी पवई परिसर के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन हुआ। वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) नेता सुजात आंबेडकर के नेतृत्व में हुए ‘जस्टिस फार साहिल’ प्रदर्शन में मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को निलंबित करने और आईआईटी मुंबई के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे के इस्तीफे की मांग भी उठाई।

प्रदर्शन के मद्देनजर बुधवार को आईआईटी परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने परिसर में प्रवेश का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया। बाद में सुजात आंबेडकर को परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई।

हालांकि, बड़ी संख्या में समर्थक मुख्य द्वार के बाहर ही रोक दिए गए। सुजात ने संस्थान के अधिकारियों के समक्ष प्रदर्शनकारियों की मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने साहिल की मौत के कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए संस्थान के उस शुरुआती बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन से चैटजीपीटी के इस्तेमाल की बात कही गई थी।

इसी बीच, साहिल की मौत की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को छुट्टी पर भेज दिया गया है। इससे पहले सोमवार को उन्हें प्रशासनिक मामलों के डीन पद से हटा दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल डूला की कोई कक्षा नहीं चल रही है।

साहिल की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए आईआईटी मुंबई ने 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति भी गठित की है। मामले की जांच कर रही समिति के समक्ष प्रोफेसर डूला से भी पूछताछ की संभावना है। डूला के खिलाफ साहिल को आत्महत्या के लिए उकसाने और जातिगत भेदभाव के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

साहिल के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने उन्हें जाति के आधार पर प्रताड़ित किए जाने, दुर्व्यवहार और अपमान की जानकारी दी थी। परिवार ने एफआईआर में नामजद प्रोफेसर डूला और निदेशक शिरीष केदारे की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

साहिल की मौत की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। पुलिस ने बुधवार को जनता और मीडिया से मामले में अटकलें लगाने तथा गलत सूचना फैलाने से बचने की अपील की। पुलिस के अनुसार जांच पूरी लगन और निष्पक्षता से की जा रही है तथा सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

जांच एसीपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और डीसीपी स्तर के अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं। जांच अधिकारी परीक्षा कक्ष, लाबी और परिसर के अन्य हिस्सों के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा कर रहे हैं। उनका प्रयास परीक्षा हाल से हॉस्टल तक साहिल की गतिविधियों और उसकी मौत से पहले की घटनाओं का क्रम तैयार करना है।

जांच के सिलसिले में कई छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। क्राइम ब्रांच के अनुसार प्रोफेसर डूला का बयान अभी दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन जल्द ही उनसे पूछताछ किए जाने की संभावना है। इससे पहले मंगलवार को आईआईटी मुंबई के सैकड़ों छात्रों ने प्रोफेसर डूला के समर्थन में प्रदर्शन किया था। आईआईटी मुंबई फैकल्टी फोरम ने भी उनके समर्थन में परिसर में मार्च निकाला।

फोरम का कहना है कि परीक्षा के दौरान स्मार्टफोन के अनधिकृत इस्तेमाल की घटना की रिपोर्ट करते समय डूला ने सीनेट द्वारा अनुमोदित दिशानिर्देशों के अनुसार निरीक्षक के रूप में अपना दायित्व निभाया था। फोरम के अध्यक्ष प्रो. राजकुमार एस. पंत ने यह भी कहा कि साहिल ने जातिगत भेदभाव के संबंध में संस्थान की एससी सेल में कोई शिकायत नहीं की थी।

साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने कहा कि परिवार ने अधिकारियों को अपना बयान दे दिया है और वह जांच में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि परिवार पवई में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर बेटे के लिए न्याय की मांग करेगा।

दूसरी ओर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने आज अपने एक्स एकाउंट पर पोस्ट एक लंबे बयान में कहा है कि मैं अपने भाषणों में अक्सर कहता हूँ कि सन 2000 के बाद से महाराष्ट्र में जाति इतनी बढ़ गई है कि स्कूल में अगल-बगल बैठे छात्र भी एक-दूसरे से पूछने लगे हैं कि वे किस जाति के हैं।

और यह इतना जहरीला रूप ले चुका है कि अब यह आईआईटी तक भी पहुंच गया है। पंडित नेहरू ने आईआईटी को आधुनिक भारत का मंदिर बताया था। उसी आईआईटी में छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सबका कारण जाति है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और कुछ नहीं हो सकता।