UPI पर भरोसे के लिए MDR ढांचे को तर्कसंगत बनाना जरूरी, IIT बॉम्बे की रिपोर्ट
आईआईटी बॉम्बे की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट ...और पढ़ें

UPI पर भरोसे के लिए एमडीआर ढांचे को तर्कसंगत बनाना जरूरी।
HighLights
यूपीआई पर जनता का भरोसा बनाए रखना आवश्यक।
प्रस्तावित एमडीआर ढांचे को तर्कसंगत बनाना जरूरी।
50 करोड़ टर्नओवर वाले व्यापारियों पर एमडीआर लागू हो।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर प्रस्तावित ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) ढांचे को लागू करने से पहले इसे तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए।
IIT बॉम्बे की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के रूप में UPI ने यूजर को बहुत अधिक सुविधा दी है और अर्थव्यवस्था की उत्पादकता बढ़ाई है। इसके दीर्घकालिक आर्थिक लाभ व्यापारी लेनदेन शुल्क से होने वाली अतिरिक्त आय की तुलना में कहीं अधिक हैं।
IIT बॉम्बे की रिपोर्ट...
रिपोर्ट में आगाह किया गया कि अगर प्रस्तावित एमडीआर ढांचा अपने मौजूदा स्वरूप में लागू किया जाता है, तो इससे UPI पर जनता का विश्वास कमजोर होगा। इसमें इस डिजिटल भुगतान प्लेटफार्म के प्रति यूजर में कोई नकारात्मक धारणा नहीं बनने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक के वार्षिक कारोबार वाले व्यापारियों के लिए कानूनन भुगतान स्वीकार करने के साधन के रूप में UPI उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि अगर सिर्फ 50 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक कारोबार (लगभग चार करोड़ रुपये प्रति माह) वाले व्यापारियों पर ही एमडीआर लागू किया जाए, तो प्रस्तावित आय का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मिल जाएगा।
रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि प्रस्तावित ढांचे में इस तरह से बदलाव और सुधार किया जाना चाहिए जिससे UPI के विस्तार के लिए राजस्व जुटाने और यूजर के बीच इसकी सुलभता तथा स्वीकार्यता बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित हो सके।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
