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साहिल वकोडे की आत्महत्या के बाद IIT Bombay के माहौल में बदलाव, STEM और ह्यूमैनिटीज के बीच बढ़ी तकरार

Published: Fri, 25 Sep 2026 11:46 AM (IST)

साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद IIT-बॉम्बे में STEM और ह्यूमैनिटीज विभागों के बीच गहरा मतभेद सामने आया है।

साहिल वाकोडे आत्महत्या के बाद IIT-बॉम्बे में गहराया विवाद (फोटो-पीटीआई)

साहिल वाकोडे आत्महत्या के बाद IIT-बॉम्बे में गहराया विवाद (फोटो-पीटीआई)

HighLights

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  2. पिता ने लगाए हैं जातिगत भेदभाव के आरोप

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डिजिटल डेस्क, मुंबई। IIT-बॉम्बे के बी.टेक सेकंड ईयर के स्टूडेंट साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद कैंपस में एक अलग ही तकरार देखने को मिल रही है। इस मामले ने STEM कम्युनिटी और ह्यूमैनिटीज डिपार्टमेंट के बीच की दरार को भी उजागर किया है।

कैंपस से लेकर सोशल मीडिया तक STEM कम्युनिटी और ह्यूमैनिटीज के बीच इनकी बातों में ये तकरार नजर आ रही है। क्या यह सच में डिसिप्लिन (अनुशासन) से जुड़ा बंटवारा है या बस एक ही विवादित घटना को देखने के दो अलग-अलग नजरिए हैं, यह अब अपने आप में एक सवाल बन गया है।

कैंपस के अंदर इस दरार के सामने आने से ये भी सवाल खड़ा होता है कि क्या किसी तरह एक ही कैंपस के भीतर दो कैंपस हैं, जो अलग-अलग विचारों से बने हैं?

IIT-B कैंपस में दरार?

IIM कोझिकोड के डायरेक्टर प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी ने इस मामले को एक फोकस्ड और ज्यादा खोजबीन करने वाले, मल्टी-फोकस्ड नजरिए के बीच के फर्क से बताया।

प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी ने कहा, 'अगर आप इंजीनियरिंग वाले नजरिए से देखें, तो दो और दो मिलकर चार ही होने चाहिए। वे यही चाहेंगे। वहीं, लिटरेचर (साहित्य) वाला नजरिया यह सवाल पूछ सकता है, दो और दो मिलकर चार ही क्यों होते हैं? क्या हो अगर जिन दो चीजों को जोड़ा जा रहा है, वे असल में अलग-अलग हों? आप सेब और अनानास को कैसे गिन सकते हैं?'

IIM कोझिकोड के डायरेक्टर ने आगे कहा, 'यह फर्क इस बारे में नहीं है कि कौन-सा नजरिया दूसरे से बेहतर है, बल्कि इस बारे में है कि हर नजरिया किस तरह के सवाल पूछने के लिए तैयार किया गया है।'

प्रोफेसर चटर्जी ने कहा, 'एक दिमाग खास लक्ष्यों पर टिका रहता है। दूसरा लगातार खोजबीन करता रहता है और सोचता रहता है।'

सोशल साइंसेज यूनिवर्सिटी के प्रमुख और एक सीनियर एकेडमिक, जो मौजूदा समय में एक इंजीनियर हैं, उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि ऐसी हर स्थिति में दो अलग-अलग भाषाएं उभरती हैं क्योंकि अलग-अलग लोग किसी घटना को अलग तरह से देखते हैं।'

सोशल साइंसेज यूनिवर्सिटी के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह कुछ वैसा ही है जैसे आप गिलास को आधा खाली देखते हैं या आधा भरा हुआ। इसके अलावा, आपके निजी अनुभव का संदर्भ यह तय करता है कि आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। इससे इस तथ्य पर कोई असर नहीं पड़ता कि STEM और ह्यूमैनिटीज के स्टूडेंट सबसे अच्छे दोस्त हो सकते हैं।'

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