नई दिल्ली [जागरण स्‍पेशल]। हमारे देश में करोड़ों लोग ब्‍लड प्रेशर की बीमारी से पीडि़त हैं। लगभग हर घर में कोई न कोई इसकी परेशानी से जूझ रहा है। वर्तमान में तो कई घरों में ही ब्‍लड प्रेशर को नापने वाली मशीन भी आपको मिल जाएंगी। लेकिन यहां पर एक बड़ा सवाल है कि ब्‍लड प्रेशर की सही स्थिति को कैसे मापा जाए। यह सवाल इसलिए बेहद खास हो गया है क्‍योंकि हाल ही में एक शोध सामने आया है, जिसके तहत इसके सही आंकलन के लिए तीन बार ब्‍लड प्रेशर को मापना बेहद जरूरी है। यह शोध पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और एम्‍स ने मिलकर किया है। यह शोध जर्नल ऑफ ह्यूमन हायपरटेंशन में छपा है।

इसमें कहा गया है कि ब्‍लड प्रेशर के पहली बार चेक करने पर ही जो रीडिंग हमारे सामने आती है उसको ही हम या डॉक्‍टर सही मानकर अपनी दवाई लिख दिया करते हैं। इसकी वजह से कई बार हमें बेवजह की दवाइयां खानी पड़ जाती हैं, जिसके चलते हमें कई बार दूसरी परेशानियां घेर लेती हैं। आपको बता दें कि ब्लड प्रेशर की समस्या या हाइपरटेंशन का यदि समय पर इलाज न किया जाए तो इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक के चांसेज बढ़ जाते हैं। इसके अलावा इसका प्रभाव किडनी पर भी पड़ सकता है। ऐसे में कुछ बातों पर ध्‍यान देना बेहद जरूरी है। 

  • कई बार डॉक्‍टर को सामने देखने भर से ही ब्‍लड प्रेशर में बदलाव आ सकता है। इस स्थिति को मेडिकल लैंग्‍वेज में वाइट कोट सिंड्रोम कहा जाता है।
  • ब्‍लड प्रेशर चैक करने के दौरान बोलने से भी इसमें उतार-चढ़ाव आता है।
  • बैठकर और लेटकर बीपी चैक करने में भी इसकी रीडिंग में फर्क आ सकता है।
  • कुछ देर चलकर आने से भी ब्‍लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
  • इसके अलावा कई दूसरी वजहों से तत्‍काल इसमें बदलाव की आशंका बनी रहती है।

इस आशंका को ही दूर करने के लिए शोध में कहा गया है कि तीन मिनट के अंतराल में तीन बार ब्‍लड प्रेशर मापना चाहिए। ऐसा करने से ब्‍लड प्रेशर की सही रीडिंग के सामने आने पर मरीज का सही इलाज किया जा सकेगा। लेकिन यदि पहली ही रीडिंग को सही मान लिया जाए तो इसमें गलती की गुंजाइश काफी रहती है, जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है। भारत जैसे देश में आज लगभग 14 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कम दामों में बल्ड प्रेशर की दवाओं की उपलब्धता और इलाज सीमित गांवों में ही है।

 

हाई ब्लड प्रेशर क्‍या है?

हाई ब्लड प्रेशर का ही दूसरा नाम हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) है। आपको पता होगा कि हमारे शरीर में मौजूद रक्त नसों में लगातार दौड़ता रहता है और इसी रक्त के माध्यम से शरीर के सभी अंगों तक ऊर्जा और पोषण के लिए जरूरी ऑक्सीजन, ग्लूकोज, विटामिन्स, मिनरल्स आदि पहुंचते हैं। ब्लड प्रेशर उस दबाव को कहते हैं, जो रक्त प्रवाह की वजह से नसों की दीवारों पर पड़ता है। आमतौर पर ये ब्लड प्रेशर इस बात पर निर्भर करता है कि हृदय कितनी गति से रक्त को पंप कर रहा है और रक्त को नसों में प्रवाहित होने में कितने अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल गाइडलाइन्स के अनुसार 130/80 mmHg से ज्यादा रक्त का दबाव हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आता है।

हाई ब्लड प्रेशर का कारण 

कारणों के अनुसार देखें तो हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप दो तरह का होता है।:

प्राइमरी हाइपरटेंशन - प्राइमरी हाइपरटेंशन ज्यादातर युवाओं को होता है और इसका कोई खास कारण नहीं होता है बल्कि लगातार अनियमित जीवनशैली की वजह से ये धीरे-धीरे समय के साथ हो जाता है। इस तरह के ब्लड प्रेशर का कारण बहुत आम होता है जैसै:

मोटापा नींद की कमी अत्यधिक गुस्सा करना मांसाहारी भोजन का अधिक सेवन तनाव तैलीय पदार्थों और अस्वस्थ खान-पान।

सेकेंडरी हाइपरटेंशन - सेकेंडरी हाइपरटेंशन वो है जो शरीर में किसी रोग के कारण या किसी स्थिति के कारण हो जाता है। आमतौर पर सेकेंडरी हाइपरटेंशन के निम्न कारण होते हैं।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया किडनी का कोई रोग एड्रीनल ग्लैंड ट्यूमर थायरॉइड की समस्या अनुवांशिक कारणों से नसों में कोई खराबी गर्भनिरोधक दवाओं का अधिक सेवन, सर्दी-जुकाम और दर्द की दवाओं का अधिक सेवन शराब, सिगरेट, ड्रग्स आदि का नशा करने से।

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण 

उच्‍च रक्‍तचाप के प्रारंभिक लक्षण में रोगी के सिर के पीछे और गर्दन में दर्द रहने लगता है। कई बार इस तरह की परेशानी को वह नजरअंदाज कर देता है, जो आगे चलकर गंभीर समस्‍या बन जाती है। आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर के ये लक्षण होते हैं।

तनाव होना सिर में दर्द सांसों का तेज चलना और कई बार सांस लेने में तकलीफ होना सीने में दर्द की समस्या आंखों से दिखने में परिवर्तन होना जैसे धुंधला दिखना पेशाब के साथ खून निकलना सिर चकराना थकान और सुस्ती लगना नाक से खून निकलना नींद न आना दिल की धड़कन बढ़ जाना।

हाई ब्लड प्रेशर का इलाज

आपको अपने आहार में नमक का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। अधिक मात्रा में नमक का सेवन, हृदय समस्‍याओं के खतरे को बढ़ाता है। यदि आप समय रहते अपने खान-पान पर ध्यान देंगे तो आपको भविष्‍य में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी। कोलेस्‍ट्रॉल नियंत्रित रखें आपको ऐसे आहार का सेवन नहीं करना चाहिए, जिससे कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर बढ़ सकता है। कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर बढ़ने से रक्‍तचाप का स्‍तर भी बढ़ता है और इसका असर आपके हृदय पर भी पड़ता है। हृदय को तंदुरुस्‍त बनाए रखने के लिए मौसमी फलों और हरी सब्जियों के साथ ही मछली का सेवन करना चाहिए।

एल्‍कोहल से रहें दूर विशेषज्ञों के मुताबिक ज्‍यादा मात्रा में एल्‍कोहल का सेवन भी आपके ब्‍लड प्रेशर को बढ़ाता है। एल्‍कोहल के सेवन से वजन बढ़ता है, भविष्‍य में यह आपके दिल के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है। स्वास्‍थ्‍य और रहन-सहन पर ध्यान देकर आप हृदय संबंधी परेशानियों से बच सकते हैं।

नियमित व्यायाम है लाभकारी नियमित व्‍यायाम करना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही व्‍यायाम आपका उच्‍च रक्‍तचाप और हृदय रोग से भी बचाव करता है। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम अवश्य करना चाहिए। यदि आप किसी रोग या समस्या से ग्रस्त हैं तो डॉक्टर से सलाह लें कि किस तरह का व्यायाम आपके लिए सही रहेगा। 

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Posted By: Kamal Verma