नई दिल्ली, जेएनएन। अन्य तमाम देशों की तुलना में भारत में बहुत समय रहते सतर्कता बरतते हुए देशव्यापी लॉकडाउन का एलान कर दिया गया था। इस लॉकडाउन के दम पर देश ने कोरोना के विरुद्ध युद्ध में अपनी स्थिति को काफी मजबूत भी कर लिया था। लेकिन इस पूरी कोशिश को तब्लीगी जमात ने अपनी गलती से कमजोर कर दिया। आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि अगर तब्लीगी जमात से जुड़े संक्रमण के मामले नहीं आए होते तो देश में कुल मामले बढ़ने की रफ्तार आधी होती। हालांकि राहत की बात है कि अब भी तब्लीगी मरीजों को हटाकर देखा जाए तो स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है। 

कोरोना मरीजों की कुल संख्या में एक तिहाई अकेले तब्लीगी  

स्वास्थ्य मंत्रालय को देश में हालात काबू में रहने की पूरी उम्मीद है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के अनुसार भारत में इस समय कोरोना के मरीजों की कुल संख्या को दोगुना होने में 4.1 दिन का समय लग रहा है। यदि तब्लीगी जमात के मरीजों को इसमें से हटा दिया जाए तो यह रफ्तार अब भी आधी है। तब्लीगी जमात से इतर मरीजों की संख्या को दोगुनी होने में अभी 7.4 दिन का वक्त लग रहा है। ध्यान देने की बात है कि देश में कोरोना मरीजों की कुल संख्या में एक तिहाई अकेले तब्लीगी जमात से जुड़े हैं। 

जांच की रणनीति सही

वैसे तो स्वास्थ्य मंत्रालय ने फिलहाल कोई आंकड़ा नहीं दिया है, लेकिन अग्रवाल ने दावा किया कि लॉकडाउन के बाद से मरीजों की संख्या में हर दिन प्रतिशत के आधार पर होने वाली बढ़ोतरी में लगातार कमी आ रही है। भारत में कोरोना वायरस को लेकर टेस्टिंग गाइडलाइंस को सही बताते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमारे यहां अभी तक केवल उन मरीजों का टेस्ट किया गया, जिनमें कोरोना के लक्षण थे। उनमें केवल तीन फीसद मरीजों में ही कोरोना के वायरस पाए गए। 

कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं 

जर्मनी, इटली, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में, जिन्होंने मास टेस्टिंग का रास्ता अपनाया, वहां भी कुल टेस्ट में से केवल तीन फीसद में ही कोरोना के वायरस मिले हैं। इससे यह भी साबित होता है कि भारत में कोरोना का वायरस अभी तक कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्तर तक नहीं पहुंचा है। पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) की कमी पर अग्रवाल ने कहा कि सरकार अन्य देशों से भी इनकी खरीद कर रही है। साथ ही समाजसेवा से जुड़े कई संगठन भी आपूर्ति बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। 

हॉटस्पॉट के लिए खास रणनीति

लॉकडाउन के अंतिम चरण में पहुंचने और कोरोना से प्रभावित हॉटस्पॉट वाले इलाकों की स्पष्ट पहचान के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय रणनीति बदलते हुए मास टेस्टिंग की तैयारी में जुट गया है। हॉटस्पॉट वाले इलाके में कोरोना वायरस को सीमित रखने लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने शनिवार को एक विस्तृत कंटेनमेंट प्लान के साथ लोगों की मास टेस्टिंग के लिए एंटीबॉडी आधारित टेस्टिंग की नई गाइडलाइन भी जारी की है। आइसीएमआर के डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर ने कहा कि बुधवार को इन इलाकों में टेस्टिंग किट पहुंच जाएगी। उसके बाद दिशानिर्देश के आधार पर टेस्टिंग शुरू कर दी जाएगी। 

एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट की होगी शुरुआत 

एंटीबॉडी आधारित ब्लड टेस्ट से कोरोना की पुष्टि नहीं होती, लेकिन इससे इंफ्लूएंजा संक्रमण का पता चलता है, जो कोरोना के कारण हो सकता है। किसी क्षेत्र में इंफ्लूएंजा के मामले अचानक बढ़ने पर भी निगाह रखी जाएगी। एंटीबॉडी टेस्ट के पॉजिटिव मरीज को संभावित कोरोना मरीज मानते हुए इलाज और आइसोलेशन से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन होगा। जांच निगेटिव होने पर लक्षण के आधार पर जरूरत हुई तो कोरोना की पुष्टि के लिए आरटी-पीसीआर जांच होगी। अन्यथा 10 दिन बाद फिर एंटीबॉडी टेस्ट होगा। एंटीबॉडी टेस्ट की जांच से नतीजे 15 से 30 मिनट में मिल जाते हैं।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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