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वो एक विचार जिसने रखी बंगाल विभाजन की नींव, इतिहास के पन्नों में दर्ज 10 लाख मौतें बनी वजह

Published: Mon, 12 Oct 2026 05:10 PM (IST)

1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन प्रशासनिक सुधार के नाम पर किया गया था, जिसकी नींव 1865-66 के ...और पढ़ें

वो एक विचार जिसने रखी बंगाल विभाजन की नींव।  (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

वो एक विचार जिसने रखी बंगाल विभाजन की नींव। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. 1865-66 अकाल में 10 लाख मौतों ने नींव रखी।

  2. लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया।

  3. प्रशासनिक सुधार के नाम पर राष्ट्रवादी गतिविधियों को कमजोर करना।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 16 अक्तूबर 1905, बंगाल के इतिहास की वो तारीख जिसने बंगाल को दो हिस्सों में बांट दिया था। लॉर्ड कर्जन के एक आदेश ने बंगाल के भूगोल को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। इस फैसले को राष्ट्रवादी नेताओं ने ब्रिटिश सरकार की सांप्रदायिक चाल के रूप में देखा।

उनका मानना था कि कांग्रेस के गठन के बाद बंगाल राष्ट्रवादी गतिविधियों का केंद्र बनकर उभरा था साथ ही हिंदू-मुस्लिम एकता को भी अंग्रेजी सरकार अपने लिए खतरा मान रही थी।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस फैसले के विचार प्रशासनिक सुधार के रूप में आया था। बात  1865-66 की है, जब कमजोर मानसून के कारण ओडिशा और बंगाल प्रेसीडेंसी के बड़े हिस्से में सूखा पड़ा गया। उस समय आज का पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, झारखंड, ओडिशा और असम मिलकर बंगाल प्रेसीडेंसी कहलाता था, जिसका शासन कोलकाता से चलता था।

10 लाख लोगों की मौत भूख से मौत

हिस्टोरियन सुमित सरकार की किताब 'द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल' के मुताबिक कलकत्ता में बैठ अंग्रेज अधिकारी जमीनी हकीकत से पूरी बेखबर रहे। जब ओडिशा भूख से तड़प रहा था, तब अधिकारियों ने मुक्त बाजार नीति का हवाला देकर समय पर अनाज भेजने से मना कर दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि ओडिशा में लगभग 10 लाख लोगों की भूख से मौत हो गई।

इतनी बड़ी संख्या भूख से लोगों की मौत प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल

इतनी बड़ी संख्या भूख से लोगों की मौत ने ब्रिटिश संसद को प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाने पर विवश कर दिया। तत्कालीन भारत सचिव सर स्टैफर्ड नॉर्थकोट ने जांच के किए जॉर्ज कैम्पबल आयोग बनाया।

बंगाल के आकार को बताया प्रभावी प्रशासन के लिए बाधा

इसके बाद 18 जनवरी 1868 को नॉर्थकोट ने एक प्रशासनिक नोट जारी किया, जिसमें कहा गया कि बंगाल का विशाल आकार प्रभावी शासन में बाधा है और ओडिशा-असम जैसे दूरदराज इलाकों तक संकट के समय प्रशासन की पहुंच कमजोर पड़ती है। बेहतर शासन के लिए बंगाल का क्षेत्र छोटा करने का सुझाव दिया गया।

लॉर्ड कर्जन ने 1905 में किया बंगाल का विभाजन

इसी सोच के तहत 1874 में असम को बंगाल से अलग कर चीफ कमिश्नर के अधीन किया गया। करीब तीन दशक बाद लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल के विभाजन किया, लेकिन इसके पीछे ब्रिटिश सरकार के राजनीतिक उद्देश्य भी थे।