बिलासपुर, जेएनएन। छत्तीसगढ़ में नि:शक्त श्रोतजन संस्थान फिजिकल रिहेब्लिटेशन सेंटर में एनजीओ (गैर सरकारी संस्था) के जरिये करीब एक हजार करोड़ रुपये का घोटाला करने के आरोपित आइएएस अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल रिव्यू पिटीशन दायर की है। याचिकाकर्ता आइएएस अधिकारियों ने हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के 31 जनवरी के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें कोर्ट ने घोटाले में सात आइएएस व पांच राज्य सेवा संवर्ग के अधिकारियों के खिलाफ सीबीआइ को एक सप्ताह के भीतर एफआइआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

आइएएस अधिकारियों के वकील ने शीर्ष अदालत से दरख्वास्त की है कि उनकी योजना को अंर्जेंट बेस पर सुना जाए। सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आइएएस और पूर्व आइएएस अधिकारियों का कहना है कि एफआइआर दर्ज करने का आदेश देने के पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया।

रिव्यू पिटीशन में किया गया उल्लेख

इसके अलावा राज्य श्रोत संगठन में पदेन सदस्य के रूप में उनकी भूमिका रही है। लिहाजा समाज कल्याण विभाग और एनजीओ के क्रियाकलापों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। रिव्यू पिटीशन में इस बात का भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2004 के बाद कई अधिकारी यह भी भूल गए थे कि वे कभी इस संस्थान के पदेन सदस्य हैं।

2008 में भारत निर्वाचन आयोग चले गए

डॉ.आलोक शुक्ला ने अपनी याचिका में कहा है कि वे सचिव स्कूल शिक्षा के नाते संस्थान के सदस्य बने थे। वर्ष 2006 में इस विभाग से हट गए और वर्ष 2008 में प्रतिनियुक्ति पर भारत निर्वाचन आयोग में चले गए थे । जिस दौरान घोटाले का जिक्र किया जा रहा है उस समय वे निर्वाचन आयोग के दिल्ली कार्यालय में कार्यरत थे।

अधिकारियों ने अपनी याचिका में यह भी सवाल उठाया है कि पिछली सरकार ने माना है कि इस समाज कल्याण विभाग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है तो कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई । याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि घोटाले की जब जानकारी मिली थी तब उनको नोटिस देकर पूछना चाहिए था कि इसमें उनकी क्या भूमिका है। नोटिस अगर दिया गया होता तो हमें अपना पक्ष रखने का मौका मिल गया होता।

Posted By: Dhyanendra Singh

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