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'लड़ाकू विमानों के स्थायी विभाजन के पक्ष में नहीं एयरफोर्स', थियेटर कमान पर एयर चीफ मार्शल का बयान

Published: Sun, 25 Oct 2026 09:49 PM (IST)

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थियेटर कमान योजना पर वायुसेना का रुख स्पष्ट किया है, जिसमें लड़ाकू ...और पढ़ें

थियेटर कमान पर वायुसेना प्रमुख का बड़ा बयान (फोटो- PTI)

थियेटर कमान पर वायुसेना प्रमुख का बड़ा बयान (फोटो- PTI)

HighLights

  1. वायुसेना लड़ाकू विमानों के स्थायी विभाजन के खिलाफ।

  2. देश की सुरक्षा जरूरतों के अनुकूल ढांचा आवश्यक।

  3. केंद्रीयकृत नियंत्रण और विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन का सिद्धांत।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने महत्वाकांक्षी 'थियेटर कमान' योजना पर अपना स्पष्ट रुख रखते हुए कहा है कि वायुसेना फाइटर एसेट (सैन्य लड़ाकू विमानों) को भौगोलिक आधार पर स्थायी रूप से बांटने के पक्ष में नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा जरूरतें विशिष्ट हैं, इसलिए विदेशी माडलों की नकल करने के बजाय देश की वास्तविक रणनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल एक अलग सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाना चाहिए।

वायुसेना प्रमुख ने एक विशेष साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि थियेटर कमान की इस पूरी प्रक्रिया में "केंद्रीयकृत नियंत्रण" (जहां जरूरी हो) और "विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन" (जहां उचित हो) का सिद्धांत अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने हाल के वैश्विक संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि वायु शक्ति किसी भी सैन्य परिणाम को निर्णायक रूप से तय कर सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य के युद्धक्षेत्र को "अत्यधिक निश्चितता" के साथ आंकने की भूल से बचना चाहिए और इस बड़े बदलाव को क्रमिक चरणों में लागू किया जाना चाहिए ताकि देश की अभियानगत तैयारी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

गौरतलब है कि भारत में 2019 में आजादी के बाद के सबसे बड़े सैन्य सुधार के रूप में थियेटर कमान योजना की घोषणा की गई थी, जिसका उद्देश्य सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं को एकीकृत करना है।

इसके तहत चीन के लिए उत्तरी (लखनऊ), पाकिस्तान के लिए पश्चिमी (जयपुर) और समुद्री मोर्चे के लिए मैरीटाइम थियेटर (तिरुअनंतपुरम) कमान बनाने का प्रस्ताव है। हालांकि, तीनों सेनाओं के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण इसकी प्रगति धीमी रही है। वायुसेना ने फाइटर स्क्वाड्रन के संभावित विभाजन को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं।

चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और तीनों सेना प्रमुखों के संयुक्त ढांचे के तहत 'आपरेशन सिंदूर' (जिसमें पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किमी चौड़ाई और 200 किमी गहराई में सटीक निशाने साधे गए थे) की सफलता का उदाहरण देते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि इसमें महत्वपूर्ण संपत्तियों के त्वरित और केंद्रीयकृत आवंटन ने निर्णायक भूमिका निभाई थी।

'आपरेशन सिंदूर' ने यह साबित कर दिया है कि कोई भी लक्ष्य उसकी पहुंच से बाहर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वायुसेना हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह इस क्षेत्र में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण 'स्प्रिंगबोर्ड' के रूप में कार्य करता है। उन्होंने दोहराया कि वायुसेना देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)