नई दिल्‍ली, पीटीआइ। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने गुरुवार को कहा कि पिछले साल पूर्वी लद्दाख में उपजे हालात में बड़ी संख्या में वायु सेना के जवानों को स्वयं को परिस्थितियों के अनुकूल बनाना पड़ा। इसके साथ ही उपकरणों का उनकी क्षमता से अधिक इस्तेमाल करना पड़ा। अगर परिस्थितियां लंबे समय तक ऐसी रहती हैं तो बल की तैयारी काफी बेहतर है। वहीं सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा कि पूर्वी लद्दाख सीमा पर स्थिति अधिक स्थिर है। दूसरी ओर सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि उन्नत निगरानी प्रणाली हासिल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उपकरणों का करना पड़ा क्षमता से अधिक इस्तेमाल

वायु सेना प्रमुख ने एक रक्षा सम्मेलन में कहा कि पिछले एक साल में क्षेत्र की कठोर परिस्थितियों में सामने आई चुनौतियों के बाद हमें आभास हुआ कि हम कहां पिछड़ गए हैं। पूर्वी लद्दाख में पिछले साल जो परिस्थितियां बनीं, उनसे हम बहुत परिचित नहीं थे। खासतौर पर उस तरह के माहौल में जिसमें हमें अभियान चलाने की जरूरत पड़ी। इसके लिए बड़ी संख्या में सैनिकों को बहुत कम समय में परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालना पड़ा। उपकरणों का क्षमता से अधिक इस्तेमाल करना पड़ा।

मजबूत की तैयारियां

वायु सेना प्रमुख ने कहा कि हमने उपकरणों को ऊंचाई पर पहुंचाया। उन ऊंचाइयों से भी ऊपर जो इन्हें हासिल करने से पहले हमने जांची-परखी थी। पिछले साल जून के मध्य में पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ने के बाद वायु सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास पूर्वी लद्दाख और अन्य स्थानों पर सुखोई 30 एमकेआइ, जगुआर और मिराज 2000 विमानों जैसे अपने लगभग सभी अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों तथा युद्धक हेलीकाप्टरों को तैनात किया था।

हर दौर में अनुकूल नतीजे की उम्मीद नहीं करनी चाहिए

सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने गुरुवार को कहा कि भारत को सीमा मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के साथ होने वाली हर दौर की बातचीत में अनुकूल परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। सीमा पर टकराव वाले चार-पांच बिंदु थे। हमने एक को छोड़कर सभी को हल कर लिया है। मुझे यकीन है कि वार्ता के कुछ और दौर में हम आगे बढ़ने पर इन मुद्दों को भी हल करने में सक्षम होंगे। सेना प्रमुख ने कहा कि चीन के साथ पूर्वी लद्दाख सीमा पर स्थिति लगभग एक साल पहले की तुलना में अब बेहतर और अधिक स्थिर है।

उन्नत निगरानी प्रणाली हासिल करना प्राथमिकता

चीफ आफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत ने गुरुवार को कहा कि उन्नत निगरानी प्रणाली हासिल करना फिलहाल सशस्त्र बलों की सर्वोच्च प्राथमिकता है। एक रक्षा सम्मेलन में उन्होंने कहा कि इससे देश को स्थलीय सीमाओं और समुद्रों की निगरानी करने में मदद मिलेगी। हमारी पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता निगरानी है। हमें ऐसी प्रणाली की जरूरत है, जो हमें स्थलीय सीमाओं और समुद्रों की निगरानी में मदद कर सके। इसके अलावा हम साइबर क्षमता को कम प्राथमिकता से उच्च प्राथमिकता की ओर ले जाना चाहते हैं।