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नारायणपुर, जेएनएन। छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में एक मां अपनी तीन और डेढ़ वर्ष की दो मासूम बच्चियों के साथ फांसी पर झूल गई, क्योंकि पुलिस ने उसके पति को नक्सली बता कर गोली मार दी थी।

घने वन वाले अबूझमाड़ के घुरबेडा पंचायत के गुमरका में हुई दिल दहला देने वाली यह घटना करीब पखवाड़ेभर पहले की है। ग्रामीणों ने पुलिस को बिना सूचना दिए ही तीनों के शव दफना दिए हैं। अब वहां के कुछ ग्रामीण बुधवार को क्षेत्रीय विधायक चंदन कश्यप से मिलने पहुंचे तब इस घटना का पता चला। ग्रामीणों ने विधायक को ज्ञापन सौंपकर गांव के पास पुलिस कैंप न खोलने और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

पांच नकस्लियों को मारने का किया गया था दावा
ग्रामीणों ने बताया कि ताडो गोटा का पति दुग्गा गोटा गत 24 अगस्त को पुलिस की गोली का शिकार हो गया था। पुलिस के अनुसार दुग्गा नक्सली था और मुठभेड़ में मारा गया। साथ ही पुलिस ने उस वक्त 80 घंटे के ऑपरेशन में पांच नक्सलियों को मार गिराने का दावा भी किया गया था।

नारायणपुर सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बिसेल नाग ने बताया कि दुग्गा गोटा और करिया गोटा को पुलिस घर से उठाकर ले गई और जंगल में गोली मारकर नक्सली बता दिया। इस घटना से दुग्गा की पत्नी ताडो को सदमा लग गया, जिसकी वजह से उसने अपनी दोनों बच्चियों के साथ आत्महत्या कर ली। बिसेल ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री से मिलकर न्यायिक जांच की भी मांग करेंगे।

सरकार आदिवासियों के साथ 
नारायणपुर के विधायक चंदन कश्यप ने बताया कि सरकार बस्तर के आदिवासियों के साथ खड़ी है। गुमरका मुठभेड़ की जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक बात पहुंचाई जाएगी। निर्दोष लोगों के साथ दु‌र्व्यवहार की शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित जवानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नक्सलियों के बहकावे में ग्रामीण 
एसपी मोहित गर्ग ने बताया कि ग्रामीण नक्सलियों के बहकावे में आकर पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं। मुठभेड़ में जवान राजू नेताम शहीद हुआ है। वहीं जवान समारू गोटा घायल हुआ था। मारे गए नक्सलियों की शिनाख्त भी हुई है। कैंप खुलने से वहां विकास होगा। कोहकामेटा, आकाबेड़ा, सोनपुर और कड़ेनार के ग्रामीण खुश हैं।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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