गुवाहाटी, प्रेट्र। कोरोना वायरस महामारी संकट के बीच इस घातक रोग के खिलाफ पूरी दुनिया के लोग जंग लड़ रहे हैं। दुनियाभर में अब तक करोड़ों लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। अकेले भारत में अब तक 50 लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना के खिलाफ इस जंग में हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इनमें से कई लोग विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कोरोना के खिलाफ जंग जीतने में कामयाब रहे हैं। ऐसे लोग अपनी सकारात्मक सोच को कोरोना के खिलाफ ढाल बनाकर लड़े।

ऐसी ही एक घटना असम में सामने आई है, जहां एक 100 साल की बुजुर्ग महिला ने कोरोना के खिलाफ जंग जीती है। डॉक्टरों ने कहा कि भले ही उनके साथ उम्र ना हो, लेकिन इस बुजुर्ग महिला ने कोरोना के खिलाफ जंग अपनी सकारात्मक सोच से जीती है। असम की सबसे बुजुर्ग महिला हांडिक को बुधवार को गुवाहाटी के महेंद्र मोहन चौधरी अस्पताल (MMCH) से छुट्टी दे दी गई। यह बुजु्र्ग महिला ओल्ड एज होम की निवासी थी।कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के दस दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इस बुजुर्ग महिला का इलाज कर रहे डॉक्टरों और नर्सों ने उनके डिस्चार्ज होने से पहले एक छोटी सेलिब्रेशन पार्टी भी की। इस पार्टी में बुजुर्ग महिला शामिल भी हुईं और उन्होंने असामी भाषा में एक गाना भी गाया। यह उनकी जिंदादिली और सकारात्मकता को दर्शाता है। हांडिक, जिन्हें अस्पताल में सभी अता (दादी) के नाम से पुकारते थे, उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि वह उनका अस्पताल में अच्छे से ख्याल रखा गया, उन्होंने रहने और खाने का आनंद लिया। उन्होंने कहा, हमें ज्यादातर दिनों में मछली या मांस दिया जाता था अंडा और केला रोज दिया जाता था। हमें रोटी भी दिया गया था। भाजी '(चपातियां और सब्जियां) जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आईं।

दुनियाभर में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा बुजुर्ग लोग प्रभावित हुए हैं, ऐसे में असम में इस 100 साल की  बुजुर्ग महिला का कोरोना के खिलाफ जंग जीतना काफी  मायने रखता है।

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