जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एनजीटी ने डीजीसीए से दिल्ली एयरपोर्ट से उड़ानों का संचालन करने वाली सभी एयरलाइनों को आकाश में मलमूत्र का निस्तारण करने के खिलाफ सर्कुलर जारी करने को कहा है।

एनजीटी प्रमुख जस्टिस यूडी साल्वी की पीठ ने कहा कि 20 दिसंबर, 2016 के आदेश के अनुसार डीजीसीए को सभी एयरलाइनों को सूचित करना चाहिए कि यदि वे इसका उल्लंघन करेंगी तो उन पर 50 हजार रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जुर्माना लगेगा।

ट्रिब्यूनल ने ये निर्देश ले. जनरल (सेवानिवृत्त) सतवंत सिंह दहिया की याचिका का निपटारा करते हुए जारी किया। याचिका में दहिया ने आरोप लगाया था कि एयरलाइनों के विमान आइजीआइ एयरपोर्ट पर लैंडिंग से पहले हवा में मानवीय मल-मूत्र गिराते हैं जो आसपास के मकानो की छत को दूषित करता है। पिछले साल दीवाली पर उनके मकान की छत पर इस तरह का मल-मूत्र गिरा था।

एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी निर्देश दिया कि वो पूर्व सैन्य अधिकारी की छत से एकत्र मल-मूत्र के नमूनों की जांच रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर दाखिल करे। इससे पहले एनजीटी ने डीजीसीए, सेंट्रल एविएशन रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा सीपीसीबी के प्रतिनिधियों की एक समिति का गठन कर छत से नमूने एकत्र कर उनकी फारेंसिक जांच कराने और यह पता लगाने को कहा था कि उक्त मलमूत्र मनुष्यों का है या चिडि़यों का। सीपीसीबी ने उक्त मल-मूत्र के मानवीय होने की आशंका जताई थी।

वर्ष 2016 में एनजीटी ने कहा था कि यदि कोई भी पंजीकृत विमान, एयरलाइन तथा एयरक्राफ्ट हैंडलिंग सर्विस हवा से मानवीय मल-मूत्र छोड़ते पाई गई तो उस पर 50 हजार रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया जाएगा। उसने डीजीसीए से औचक निरीक्षण कर यह पता लगाने को कहा था कि लैंडिंग के बाद विमानों की टायलेट टंकिंयां खाली तो नहीं हैं।

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Posted By: Gunateet Ojha

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