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अब अस्पताल नहीं वसूल पाएंगे औने-पौने दाम, स्थानीय भाषा में लगानी होगी स्वास्थ्य सेवाओं की रेट लिस्ट

Published: Mon, 12 Oct 2026 08:44 PM (IST)

देशभर के चिकित्सा संस्थानों को अब अनिवार्य रूप से स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में अपनी सेवाओं के शुल्क प्रदर्शित करने होंगे।

अब अस्पताल नहीं वसूल पाएंगे औने-पौने दाम। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

अब अस्पताल नहीं वसूल पाएंगे औने-पौने दाम। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. अस्पतालों को स्थानीय भाषा में शुल्क प्रदर्शित करना होगा।

  2. स्वास्थ्य मंत्रालय ने पारदर्शिता के लिए निर्देश जारी किए।

  3. मरीज अब सेवाओं का खर्च आसानी से जान पाएंगे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। देशभर के चिकित्सा संस्थानों को अब अनिवार्य रूप से स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में अपने संस्थान में दी जाने वाली सेवाओं और सुविधाओं के शुल्क स्पष्ट रूप से बोर्ड पर प्रदर्शित करने होंगे। वह भी ऐसी जगह जहां वह सभी को आसानी से नजर आएं।

यानी अब चिकित्सा संस्थान मरीज से औने-पौने दाम नहीं वसूल पाएंगे। मरीज की पूरी जानकारी में रहेगा कि उसे किस टेस्ट और सेवा के लिए कितना शुल्क देना है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं। यह कदम पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीजों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा है कि लागू नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और ऐसे उपाय किए जाएं जिससे स्वास्थ्य देखभाल सेवा पर आने वाले खर्च की जानकारी मरीजों और तीमारदारों को स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सके।

मरीजों द्वारा वहन किए जाने वाले खर्च में पारदर्शिता को महत्व

स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के लिए मरीजों द्वारा वहन किए जाने वाले खर्च में पारदर्शिता के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि शुल्क को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने से मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के संभावित खर्च को समझने, चिकित्सा से जुड़े सही फैसले लेने और अपने मेडिकल खर्च की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

व्यापक पारदर्शिता से बेवजह की उलझन और बिल से जुड़े विवाद कम करने में मदद मिलेगी, साथ ही स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में भरोसा और विश्वास भी बढ़ेगा।

पत्र में चिकित्सा संस्थान (पंजीकरण एवं नियमन) अधिनियम 2010 और चिकित्सा संस्थान (केंद्र सरकार) नियम 2012 का उल्लेख किया गया है जोकि चिकित्सा संस्थानों के लिए विनियामक ढांचा (रेगुलेटरी फ्रेमवर्क) उपलब्ध कराते हैं।

नियमों के तहत, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अधिनियम लागू है, वहां चिकित्सा संस्थानों के लिए जरूरी है कि वे मरीजों और उनके साथ आने वाले लोगों की सुविधा के लिए दी जाने वाली हर तरह की सेवा और उपलब्ध सुविधाओं के शुल्क को किसी ऐसी जगह पर प्रदर्शित करें, जहां वे आसानी से नजर आए।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)