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क्या फिर होने वाला है एलपीजी-तेल का संकट? होर्मुज में तनाव से भारत पर कितना असर

Published: Thu, 09 Jul 2026 08:46 PM (IST)

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से भारत के कच्चे तेल आयात पर सीमित असर की संभावना है, लेकिन लंबे समय तक ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के कच्चे तेल आयात पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव का असर सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, यदि क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है तो एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है तथा लागत बढ़ सकती है।

केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, ‘हालिया तनाव बढ़ने से पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये कच्चे तेल का प्रवाह पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ था। हालांकि, भारत के लिए पिछले 100 दिन में स्थिति काफी हद तक सामान्य रही है और तेल शोधन कंपनियों ने विविध आयात स्रोतों के जरिये आपूर्ति का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।’

होर्मुज तनाव से कच्चे तेल आयात पर सीमित असर

कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी काफी अधिक बनी हुई है। वहीं, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से होने वाली आपूर्ति से ऊर्जा सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिलती है।

इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से होने वाले कच्चे तेल ने भी आयात स्रोतों में विविधता लाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि जून में भारत का कच्चे तेल आयात बढ़कर रिकार्ड 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया।

भारत ने रूस सहित विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित की

रूस से भारत का कच्चे तेल आयात बढ़कर करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, जो जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक है। इससे रूस, भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि संभावित आपूर्ति बाधाओं के बावजूद ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय तेल शोधन कंपनियों के लिए निकट भविष्य में बड़ा स्रोत बनने की संभावना नहीं है। अमेरिकी प्रतिबंध नीति को लेकर अनिश्चितता, अनुपालन जोखिम और व्यावसायिक कारण इसके पीछे प्रमुख वजह हैं।