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कतर से अमेरिका तक... भारत किन-किन देशों से मंगाता है LNG? देखें लिस्ट

Published: Wed, 01 Apr 2026 12:51 PM (IST)

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते भारत सरकार ने ...और पढ़ें

होर्मुज संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम घरों और CNG को गैस की पूरी आपूर्ति (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

होर्मुज संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम घरों और CNG को गैस की पूरी आपूर्ति (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए गैस सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 'नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026' लागू किया है, ताकि देश में जरूरी क्षेत्रों को गैस की कमी न हो।

इस फैसले का मुख्य मकसद यह है कि आम लोगों, वाहनों और खेती से जुड़े काम प्रभावित न हों। इसके तहत घरों में पाइप से मिलने वाली गैस (PNG), वाहनों के लिए CNG और LPG उत्पादन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है।

सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण गैस की सप्लाई में बाधा आ रही है और भविष्य में कमी की आशंका भी बढ़ गई है।

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किन देशों पर निर्भर है भारत की LNG सप्लाई?

भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई इन देशों से होती है:-

  • कतर: 40-45%
  • ऑस्ट्रेलिया: 15-20%
  • संयुक्त राज्य अमेरिका: 10-12%
  • रूस: 5-8%
  • ओमान: 3-5%
  • UAE: 3-4%
  • नाइजीरिया: 2-3%
  • अंगोला: 1-2%

होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपमेंट पर मंडरा रहे खतरों को देखते हुए, भारत सरकार ने हाल ही में 'नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026' जारी किया है। इसका मकसद घरों, परिवहन और उर्वरक उत्पादन के लिए गैस की सप्लाई को प्राथमिकता देना है।

किन सेक्टर को मिलेगी प्राथमिकता?

सरकार के नए आदेश के मुताबिक, घरों में इस्तेमाल होने वाली PNG, वाहनों के लिए CNG और LPG उत्पादन को पिछले छह महीनों के औसत के आधार पर 100% गैस सप्लाई दी जाएगी।

वहीं उर्वरक (फर्टिलाइजर) बनाने वाले कारखानों को 70% गैस सप्लाई सुनिश्चित की गई है, ताकि खेती के लिए जरूरी खाद की कमी न हो। इसका मतलब है कि सरकार सबसे पहले आम लोगों और कृषि से जुड़े क्षेत्रों को सुरक्षित रखना चाहती है, ताकि रोजमर्रा की जिंदगी पर ज्यादा असर न पड़े।

भारत की गैस पर कितनी निर्भरता?

भारत की LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) सप्लाई का करीब 55 से 65 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। वहीं LPG की बात करें तो करीब 90 प्रतिशत आयात इसी रास्ते से होता है। भारत की घरेलू जरूरतें भी काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं।

कतर भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर है, जो लगभग आधी आपूर्ति करता है। इसके बाद यूएई और ओमान का स्थान आता है। इसी वजह से इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।

सरकार और नौसेना की तैयारी

स्थिति को संभालने के लिए भारतीय नौसेना भी सक्रिय हो गई है। नौसेना के जहाज गैस और LPG ले जाने वाले टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देने का काम कर रहे हैं। हाल ही में 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' जैसे जहाज 90 हजार टन से ज्यादा LPG लेकर सुरक्षित भारत पहुंचे हैं।

इसके अलावा अन्य जहाजों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, ताकि सप्लाई बनी रहे। साथ ही सरकार पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ा रही है, ताकि भविष्य में ऐसे संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

नए विकल्पों की तलाश

भारत अब सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसी वजह से सरकार अमेरिका, रूस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से गैस आयात बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

इस रणनीति का उद्देश्य यह है कि अगर किसी एक क्षेत्र में संकट आए, तो दूसरे विकल्पों से सप्लाई जारी रखी जा सके। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम देश में गैस की कमी को रोकने और आम लोगों पर असर कम करने के लिए उठाया गया है।

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