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नाकाबंदी, पाकिस्तान में वार्ता और चीन की एंट्री: होर्मुज के बहाने क्या चाल चल रहे ट्रंप, भारत को रहना होगा अलर्ट?

Published: Tue, 14 Apr 2026 11:30 PM (IST)

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी और पश्चिम एशिया तनाव के बीच अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता की तैयारियां ...और पढ़ें

ट्रंप की अगली चाल का इंतजार कर रही दुनिया (फोटो-रॉयटर्स)

ट्रंप की अगली चाल का इंतजार कर रही दुनिया (फोटो-रॉयटर्स)

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता की तैयारियों के बीच खबर है कि ये वार्ता विदेश मंत्री स्तर पर हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक की अगुआई अमेरिका की तरफ से विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ईरान से विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर सकते हैं।

पाकिस्तान में होगी अगली बैठक?

पाकिस्तान भी जीतोड़ कोशिश में लगा है कि ये वार्ता इस्लामाबाद में हो, जबकि जेनेवा और विएना का भी नाम चल रहा है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान में वार्ता हो सकती है। ईरान ने भी इस्लामाबाद को ही पसंदीदा जगह बताया है।

ट्रंप ने ईरान को चेताया है कि तेहरान ने समझौता नहीं किया तो युद्धविराम के बाद स्थिति अच्छी नहीं होगी। वहीं, चीन ने होर्मुज नाकेबंदी को खतरनाक और गैरजिम्मेदाराना करार देते हुए स्थायी शांति के लिए चार सूत्री प्रस्ताव पेश किया है।

चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने, संवाद बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है। नाकेबंदी के बावजूद वार्ता की संभावनाओं से वैश्विक बाजार ने राहत की सांस ली है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी कहा है कि जटिल मामलों का समाधान रातोंरात नहीं हो सकता। उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत जारी रखने और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की अपील की।

अमेरिकी नाकेबंदी के बीच होर्मुज से तीन ईरानी तेल से भरे टैंकर गुजरे हैं। हालांकि, ये ईरान के बंदरगाह से नहीं निकले। होर्मुज में यूएसएस अब्राहम लिंकन समेत 11 डेस्ट्रायर जहाजों के साथ अमेरिका ने नाकेबंदी चुस्त कर दी है। वहीं, तीन अन्य युद्धपोत भी खाड़ी में अलग-अलग जगहों पर मौजूद हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों ने कहा है कि वह ब्रिटिश पीएम स्टार्मर के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए शुक्रवार को बैठक करेंगे। होर्मुज को खुलवाने के उपायों पर चर्चा के लिए होनेवाली इस बैठक में 40 देशों के हिस्सा लेने की संभावना है। उधर, वाशिंगटन में इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम को लेकर राजदूत स्तर की बातचीत शुरू हो गई है। हिजबुल्ला ने इसका विरोध किया है।

दो हफ्ते के युद्धविराम की आखिरी तारीख

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम के खत्म होने की तारीख (21 अप्रैल) नजदीक आने के चलते पाकिस्तान की तरफ से दोनों पक्षों को फिर से वार्ता की मेज पर लाने की कोशिश की जा रही है। माना जा रहा है कि दूसरे दौर की वार्ता 16 अप्रैल के आसपास हो सकती है।

गौरतलब है कि 47 वर्षों में पहली बार अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेताओं के बीच सीधी बातचीत हाल ही में इस्लामाबाद में हुई थी, हालांकि कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।

रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस मामले में काफी बढि़या काम कर रहे हैं इसलिए ज्यादा संभावना यही है कि अगली बैठक इस्लामाबाद में होगी। इस पूरे मामले में व्हाइट हाउस की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है।

सूत्रों का ये भी कहना है कि भले ही वार्ता इस्लामाबाद से बाहर हो, लेकिन उसमें भी पाकिस्तान की भूमिका अहम रह सकती है। वार्ता पाकिस्तान की मेजबानी में होने की संभावना है।

अधिकारियों का ये भी कहना है कि अगर दूसरे दौर की वार्ता के सकारात्मक नतीजे आए तो अगली बार शिखर सम्मेलन स्तर की बातचीत का आयोजन हो सकता है।

हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए राष्ट्रपति स्तर की बातचीत के कोई संकेत नहीं हैं। वहीं, ईरानी नेता अपनी सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते, यही वजह है कि वह इस्लामाबाद में ही बैठक करना चाहते हैं। पहले दौर की वार्ता के बाद ईरानी नेता सड़क मार्ग से ईरान लौटे थे। उनके विमान अगले दिन ईरान रवाना हुए थे।

ईरान बातचीत को तैयार, लेकिन भरोसे की कमी

अल जजीरा के मुताबिक, ईरान अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दोनों में भरोसे की कमी है। ईरानी विदेश मंत्री लगातार अलग-अलग देशों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। वहीं ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत आमिर सईद इरावनी ने होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी पर कड़ी निंदा करते हुए इसे ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सरासर उल्लंघन बताया है।

ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, इरावनी ने गुटेरस को लिखे पत्र में अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामकता की अवैध गतिविधि बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई से यूएन चार्टर के अनुच्छेद 2 के पैराग्राफ 4 का उल्लंघन होता है, जो बल प्रयोग या धमकी को प्रतिबंधित करता है।

होर्मुज में अमेरिका के 12 युद्धपोत एपी के अनुसार, अमेरिकी सेना (सेंटकाम) ने दावा किया कि नाकाबंदी में 10,000 से ज्यादा सैनिक और करीब 12 नौसेना के जहाज तैनात हैं।

अमेरिकी सेना ने दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट में की गई नाकाबंदी के कारण छह व्यापारी जहाज रास्ते से ही वापस लौट गए।वहीं, ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने कहा है कि होर्मुज पर नाकाबंदी से देश पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

ईरान के पास 8000 किलोमीटर से ज्यादा लंबी समुद्री और जमीनी सीमाएं हैं, जिससे जरूरी सामानों की आपूर्ति दूसरे रास्तों से जारी रखी जा सकती है। उन्होंने सीमांत इलाके के अधिकारियों को आदेश दिया है कि जरूरी चीजों का आयात आसान बनाया जाए, ताकि नाकाबंदी के असर को कम किया जा सके।

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