नई दिल्ली, एएनआइ। आतंकवाद और सीमा पार अपराधों के खिलाफ जीरो टालरेंस (शून्य सहनशीलता) की नीति बनाए रखने के उद्देश्य से, केंद्र ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किमी भीतर तक तलाशी करने, संदिग्धों को गिरफ्तार करने और जब्ती करने का अधिकार दिया है। यह व्यवस्था भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लागू होगी। गृह मंत्रालय द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में जारी एक नए आदेश से बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया गया है। इससे बीएसएफ के अधिकारियों को 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए कार्रवाई करने की अनुमति मिल गई है।

बिना वारंट गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती कर सकेंगे अधिकारी

हालांकि इस आदेश से कुछ राज्यों में प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद पैदा हो सकता है। ताजा आदेश के अनुसार, बीएसएफ, जिसे पंजाब, बंगाल और असम में सीमा से पंद्रह किलोमीटर अंदर तक कार्रवाई करने का अधिकार था, को अब बिना किसी बाधा या अनुमति के 50 किमी भीतर तक संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों की तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की छूट मिल गई है। इसके लिए उसे केंद्र या राज्य सरकारों से कोई अनुमति नहीं लेनी होगी।हालांकि पूर्वोत्तर के पांच राज्यों- मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में इसके अधिकार क्षेत्र में 30 किमी की कटौती की गई है। वहां इसका अधिकार क्षेत्र पहले 80 किमी तक था।

हालांकि कुछ राज्यों में उसके अधिकार क्षेत्र में कटौती भी हुई

इसी तरह गुजरात में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 80 से घटाकर 50 किमी कर दिया गया है। राजस्थान में, बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र पहले की तरह 50 किमी पर समान रहेगा। सीआरपीसी के तहत बीएसएफ का सबसे निचली रैंक का अधिकारी अब मजिस्ट्रेट के आदेश और वारंट के बिना अपनी शक्तियों और कर्तव्यों के पालन और निर्वहन कर सकता है।बीएसएफ अधिकारी को अब ऐसे किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार है जो किसी भी संज्ञेय अपराध में शामिल है, या जिसके खिलाफ उचित शिकायत की गई है, या विश्वसनीय जानकारी प्राप्त हुई है।

Edited By: Arun Kumar Singh