नई दिल्ली। राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली की कॉल डिटेल्स गलत तरीके से निकाले जाने के मामले में शुक्रवार को गृह मंत्री सुशील कुमार ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से किसी नेता की फोन टैपिंग नहीं करवाई गई। शिंदे ने कॉल डिटेल निकलवाने को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि इस मामले में गिरफ्तार कांस्टेबल पिछले एक वर्ष से ड्यूटी पर नहीं था।

राज्य सभा में फोन टैपिंग मामले पर बोलते हुए शिंदे ने कहा कि कांस्टेबल डबास छह माह से एसीपी की आईडी पाने की फिराक में था। वह पंद्रह सौ रुपये में कॉल डिटेल्स बेचता था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने चौदह फरवरी को मामला दर्ज किया था। इस संबंध में एयरटेल के अधिकारी से भी पूछताछ की गई है।

जेटली कॉल डीटेल्स मामले की जांच कर रही एजेंसी को पता चला है कि जेटली के अलावा भी कई बीजेपी नेताओं के कॉल डिटेल्स गलत तरीके से निकाले जा रहे थे। फिलहाल जांच एजेंसियों इस मामले की जांच में जुटी हैं। इस मुद्दे पर बुधवार को राज्य सभा में काफी हंगामा हुआ था, जिस कारण सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित भी करनी पड़ी थी।

विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से बिना शर्त माफी मांगने की मांग कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में जिन लोगों की कॉल डिटेल्स को खंगाला जा रहा है कि उसमें बड़े उद्योगपति और कुछ राजनेता भी शामिल है। जांच एसेंसी के मुताबिक अनुराग, नीतीश और अरविंद ने 60 लोगों के कॉल डीटेल्स निकाले थे। इसमें अरुण जेटली समेत नितिन गडकरी, विजय गोयल, सुधांशु मित्तल जैसे कुछ अन्य नेताओं के अलावा पूर्व आपीएल कमिश्नर ललित मोदी का नाम भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक इस मामले का मुख्य आरोपी अनुराग कॉल डिटेल्स बेचने का काम करता था।

माना जा रहा है कि इस मामले में गिरफ्तार कांस्टेबल की भूमिका केवल कॉल डिटेल्स निकलवाने तक ही हो सकती है। बुधवार को इस मुद्दे पर सपा नेता नरेश अग्रवाल, भारतीय जनता पार्टी के सांसद, जनता दल (यू) मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, अन्नाद्रमुक और बीएसपी के नेताओं ने भी काफी हंगामा किया था। इन सभी की मांग थी कि गृहमंत्री इस मुद्दे पर सदन में आकर बयान दें।

गौरतलब है कि इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस कर रही है और इस मामले में एक पुलिस कांस्टेबल समेत तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में जिस अनुराग नाम के व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है कि उसका नाम पहले भी वर्ष 2005 में राज्य सभा सांसद अमर सिंह के फोन टैपिंग मामले में भी सामने आया था।

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