जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। महज हिंदी पखवाड़े तक हिंदी में सरकारी कामकाज को लेकर उठते रहे सवालों के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग नए-नए शब्दों को गढ़ने और पहले से प्रचलित हिंदी शब्दों के लिए सरल शब्द को तैयार करने के काम में जुटा हुआ है। इस दौरान उसका ध्यान तकनीकी शब्दों को लेकर ज्यादा केंद्रित है। आयोग का दावा है कि हर साल ऐसे कम से कम दो से तीन हजार शब्द तैयार किए जाते है।

आयोग का कहना है कि इसके लिए वह विभागों के ऐसे शब्द मांगते है, जिनका हिंदी शब्द नहीं है, या फिर मौजूदा समय में जो शब्द इस्तेमाल हो रहा है, वह सटीक और सरल नहीं है। इसके अलावा वह सरकारी विभागों के पत्राचार और लेखन पर भी नजर रखता है, जहां से ऐसे शब्दों का चयन करता है, जिन्हें और सरल किया जा सकता है।

फिलहाल आयोग विधि विभाग को छोड़कर सरकार से जुड़े सभी विभागों के लिए शब्द बनाने का काम करता है। आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अवनीश कुमार के मुताबिक 49 विभागों के लिए अब तक वह नए शब्दों को गढ़ने का काम कर चुके है।

गढ़े गए शब्दों में ज्यादातर तकनीकी और वैज्ञानिक शब्द है शामिल

उनका कहना है कि प्रत्येक विभागों में बड़े पैमाने पर अंग्रेजी में ऐसे तकनीकी शब्द प्रयुक्त होते है, जिनका हिंदी में कोई सटीक शब्द नहीं है। ऐसे में हम लंबे शोध और अध्ययन के बाद इनके लिए हिंदी में नए शब्द गढ़ते है। आयोग का दावा है कि 1960 में गठन के बाद से अब तक साढ़े आठ लाख से ज्यादा हिंदी के नए और सरल शब्द वह तैयार कर चुका है।

आयोग ने ही गढ़ा था 'सांसद' शब्द

संसद सदस्य के लिए सांसद और टेलीविजन के लिए दूरदर्शन जैसे प्रचलित शब्द को इसी आयोग ने गढ़ा है। इसके अलावा आकाशवाणी जैसा शब्द भी इसी की देन है।

Posted By: Bhupendra Singh