लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश की निलंबित आइएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के अवैध खनन रोकने के लिए उठाए सख्त कदमों की प्रशंसा की है और उन्हें बहादुर बताया है। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से खनन मामले में की गई संपूर्ण कार्रवाई का ब्योरा तलब किया है। अदालत ने दुर्गा के निलंबन मामले में दखल देने से इन्कार करते हुए कहा कि यदि वह स्वयं चाहें तो निलंबन मामले में अलग से याचिका प्रस्तुत कर सकती हैं।

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बतौर एसडीएम दुर्गा ने 24 डंफर जब्त करने तथा पंद्रह लोगों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की थी। अधिकारी के निलंबन मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस अशोक पाल सिंह की पीठ ने कहा कि अवैध खनन से पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होता है तथा पूरे समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है। इसलिए अधिकारी के कदम की प्रशंसा की जानी चाहिए। पीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि वह पूरा ब्योरा दे कि दुर्गा शक्ति ने अवैध खनन रोकने के लिए क्या-क्या किया तथा कितने डंफर, मशीनें आदि जब्त कराई व गिरफ्तारियां कीं। पीठ ने यह भी जानना चाहा है कि आइएएस अधिकारी के निलंबन के बाद सरकार ने खनन रोकने के मामले में क्या कार्रवाई की।

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बतौर एसडीएम दुर्गा ने 24 डंफर जब्त करने तथा पंद्रह लोगों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की थी। अधिकारी के निलंबन मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस अशोक पाल सिंह की पीठ ने कहा कि अवैध खनन से पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होता है तथा पूरे समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है। इसलिए अधिकारी के कदम की प्रशंसा की जानी चाहिए। पीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि वह पूरा ब्योरा दे कि दुर्गा शक्ति ने अवैध खनन रोकने के लिए क्या-क्या किया तथा कितने डंफर, मशीनें आदि जब्त कराई व गिरफ्तारियां कीं। पीठ ने यह भी जानना चाहा है कि आइएएस अधिकारी के निलंबन के बाद सरकार ने खनन रोकने के मामले में क्या कार्रवाई की।

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