मुंबई (जेएनएन)। मुंबई उच्चन्यायालय ने कमला मिल्स अग्निकांड के संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह घटना अंतरात्मा को हिला देनेवाली है। उच्च न्यायालय का मानना है कि यह दुर्घटना आग से बचने के लिए बनाए गए नियम-कायदों का सही पालन न होने का नतीजा है। 

 

उच्च न्यायालय आज मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त जूलियो रिबैरो द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। न्यायमूर्ति आर.एम.बोर्डे एवं आर.जी.केतकर की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह घटना आंख खोलनेवाली है। इसके बाद मुंबई महानगरपालिका को सभी होटल-रेस्टोरेंट्स में किए गए सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण करना चाहिए। ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

 

29 दिसंबर, 2018 की रात कमला मिल्स कंपाउंड में स्थित दो रेस्टोरेंट्स में हुए इस अग्निकांड में 14 लोग मारे गए थे और 30 घायल हुए थे। बीएमसी की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील अनिल साखरे ने कहा कि राज्य सरकार ने बीएमसी आयुक्त अजय मेहता से इस दुर्घटना पर रिपोर्ट देने को कहा है। इस सप्ताह के अंत तक यह रिपोर्ट दे दिए जाने की उम्मीद है। 

 

उच्च न्यायालय ने उक्त रिपोर्ट की एक प्रति अगली तारीख पर इस पीठ के सामने भी प्रस्तुत करने करने के निर्देश दिए। अगली तारीख 12 फरवरी को है। उच्च न्यायालय ने बीएमसी से एक हलफनामा भी दायर करने को कहा है कि जिसमें होटलों-रेस्टोरेंट्स को खानपान की चीजें परोसने का लाइसेंस देने के नियमों की जानकारी विस्तार से दी गई हो। उच्च न्यायालय ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि बीएमसी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह ठीक ढंग से करेगी। न्यायमूर्ति बोर्डे ने कहा कि रेस्टोरेंट्स में लगी आग नियम-कानून का ठीक से पालन न करवा पाने का नतीजा है। खासतौर से इस अग्निकांड के मामले में अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पब के पास लाइसेंस तक नहीं था। 

 

न्यायमूर्ति बोर्डे ने टिप्पणी की कि यदि किसी दुकान को खाना पकाने और परोसने की अनुमति दी जाती है, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि उसके पास इसके लिए पूरे संसाधन हैं भी या नहीं। अग्निसुरक्षा से जुड़े नियमों का भी पूरा पालन किया जाना चाहिए। लाइसेंस दिए जाने के बाद भी अधिकारियों को रेस्टोरेंट्स पर बराबर निगाह रखनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह संभव है कि कोई रेस्टोरेंट्स अनुमति लेकर कुछ समय के लिए कोई निर्माण करे और अनुमति की अवधि समाप्त होने के बाद भी उसे न हटाए। उच्च न्यायालय ने सड़क के किनारे खान-पान का सामान बेचनेवाले फूड स्टॉल्स पर भी निगाह रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस याचिका में इंडियन होटल्स एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन को भी हस्तक्षेप करने की अनुमति दी है। 

 

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Posted By: Kishor Joshi

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