'असहमति अधिकार है मगर संस्थाओं को कमजोर करना नहीं', हार्वर्ड से जुड़े 44 विद्वानों ने जारी किया बयान
हार्वर्ड से जुड़े 44 भारतीय विद्वानों ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर बिना सबूत के हो रहे हमलों की निंदा की है।

असहमति अधिकार है मगर संस्थाओं को कमजोर करना नहीं।
HighLights
हार्वर्ड विद्वानों ने संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों की निंदा की।
बिना सबूत संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करना गलत।
संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र का सम्मान आवश्यक है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन की विदेशों में भी चर्चा हो रही है।
इसी कड़ी में हार्वर्ड से जुड़े 44 भारतीय विद्वानों, वकीलों, विज्ञानियों, सिविल सेवकों और पेशेवरों ने 'संवैधानिक जिम्मेदारी, कानून के शासन और संस्थागत अखंडता' शीर्षक से एक संयुक्त बयान जारी कर भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर बिना सुबूत के हमलों और नकारात्मक अभियानों की निंदा की है। उन्होंने कहा कि असहमति का अधिकार है, लेकिन बिना सुबूत संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करना सही नहीं है।
बुधवार को जारी बयान में कहा गया कि बिना सही अनुमति के किसी राजनीतिक अभियान को विश्वनीयता देने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही ये अपील की गई कि संवैधानिक मूल्यों व लोकतंत्र से जुड़ी संस्था के प्रति ज्यादा सम्मान की जरूरत है।
बयान में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि चुनाव आयोग, मुख्य न्यायाधीश कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट और संसद के खिलाफ नकारात्मक बातें सार्वजनिक मंच से हो रही हैं। इसके साथ ही सुनियोजित अभियान को लेकर भी रोष व्यक्त किया गया है।
संवैधानिक अधिकारियों के लिए 'चोर' और 'समझौतावादी' शब्दों के इस्तेमाल पर एतराज जताया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को कम करती हैं। इसके साथ ही गंभीर चिंता पैदा करती है कि लोग कैसे इस तरह के माहौल में विश्वास करेंगे।
बयान में कहा गया कि ऐसी संस्थाओं के कामों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि जांच के बारे में भी कहा कि ये उचित प्रक्रिया और सही सुबूत पर ही आगे बढ़े। उन्होंने सरकारी अधिकारियों और उनके पदों का सम्मान करने की जरूरत पर जोर दिया। बयान में कहा गया-"संविधान, कानून के शासन और नागरिक स्वतंत्रता का हर समय सम्मान किया जाना चाहिए, न कि सिर्फ तब जब यह तक कि यह हमारे हितों के अनुकूल हो।"
इसमें कहा गया कि हमारा संकल्प संविधान के प्रति होना चाहिए, न कि सुविधा के प्रति। हस्ताक्षर करने वाले हार्वर्ड के कई स्कूलों से जुड़े हैं। इनमें हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, हार्वर्ड कैनेडी स्कूल, हार्वर्ड लॉ स्कूल, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, हार्वर्ड एक्सटेंशन स्कूल, हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल, हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन शामिल हैं।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
