'भारत में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश', हरीश साल्वे बोले- अशांति भड़काने में विदेशी ताकतों की भूमिका
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि विरोध के अधिकार की आड़ में भारत में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने ...और पढ़ें

भारत में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश।
HighLights
विरोध के नाम पर भारत में अस्थिरता का प्रयास।
हरीश साल्वे ने विदेशी ताकतों की भूमिका पर सवाल उठाए।
प्रदर्शनों के लिए विदेशी फंडिंग की जांच की मांग।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा है कि विरोध के अधिकार के नाम पर भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्हें भारत में व्यापक जन-विद्रोह के कोई संकेत नहीं दिखते। उन्होंने दावा किया कि अशांति भड़काने में विदेशी ताकतों की भूमिका हो सकती है।
साल्वे ने सोमवार को एक साक्षात्कार में कहा कि विरोध प्रदर्शनों की कुछ गतिविधियों के लिए विदेशी धन मुहैया कराया जा रहा है। कुछ समूह भारत सरकार को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शनों के लिए धन के स्रोतों पर भी सवाल उठाया। पड़ोसी देशों में राजनीतिक घटनाक्रमों से तुलना करते हुए उन्होंने क्षेत्र में उथल-पुथल में बाहरी ताकतों की भूमिका पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा,‘क्या इस बात में कोई संदेह है कि नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में उथल-पुथल के पीछे कौन था? शेख हसीना को किसने हटाया और वहां नए प्रधानमंत्री को कौन लेकर आया? मेरी राय में इन घटनाओं के पीछे बाहरी ताकतें थीं।’
उन्होंने दावा किया कि पिछले छह से आठ महीनों के घटनाक्रम से सरकार के कामकाज में बाधा डालने की कोशिशों का एक सिलसिला दिखता है। छह से आठ महीनों में स्पष्ट पैटर्न उभरा है। ये समूह मोदी सरकार को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
विदेशी वित्तपोषण की जांच हो
साल्वे ने कहा कि सरकार को विदेशी वित्तपोषण के आरोपों की जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। साल्वे का तर्क था कि जब लोग किसी मुद्दे से जुड़ते हैं, तो वास्तविक जनांदोलनों को समर्थन मिलता है।
भारत में दीपके, सौरव दास व कुछ यूट्यूबरों सहित कुछ लोग प्रदर्शनों के नेता बनकर सामने आए। कुछ लोग जर्मनी व दूसरे देशों में रहते हैं और यहां नेता बनते हैं। उन्हें पैसा कहां से मिलता है?
भ्रामक नैरेटिव पर चिंता
उन्होंने डिजिटल मंचों के जरिये भ्रामक नैरेटिव फैलने पर भी चिंता जताई। इनमें यूट्यूब वीडियो, रील्स और छोटे संदेश शामिल हैं। साल्वे ने कहा कि उनके आकलन में व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश करने वाले आंदोलनों से निपटना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्हें नहीं लगता कि यह आंदोलन लंबे समय तक चलेगा।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
