नई दिल्ली (जेएनएन)। 17 अप्रैल को जैन धर्म के प्रमुख गुरु भगवान महावीर की 2617 वीं जयंती (  Mahavir Jayanti 2019 )  मनाई जा रही है। महावीर जयंती जैन समुदाय का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। जैन समाज के चौबीस तीर्थकरों में से महावीर अंतिम तीर्थकर माने जाते हैं, इस वजह से इन्हें मतावलंबी भी कहा जाता है। भगवान महावीर का जन्म 599 ईसवीं पूर्व बिहार में लिच्छिवी वंश के महाराज सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के घर हुआ। उनके बचपन का नाम वर्धमान था जो उनके जन्म के बाद से राज्य की तीव्र गति से तरक्की के चलते दिया गया। भगवान महावीर की जयंती पर

प्रस्तुत हैं उनके अनमोल विचार...

1- आत्मा अकेले आती है, अकेले चली जाती है, न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है।

2- क्रोध हमेशा अधिक क्रोध को जन्म देता है और क्षमा और प्रेम हमेशा अधिक क्षमा और प्रेम को जन्म देते हैं।

3- ईश्वर का अलग से कोई अस्तित्व नहीं है। हर कोई सही दिशा में चलकर देवत्त्व प्राप्त कर सकता है।

4- आपने कभी किसी का भला किया हो तो उसे भूल जाओ और कभी किसी ने आपका बुरा किया हो तो उसे भूल जाओ।

5- मनुष्य के दुखी होने की वजह खुद की गलतियां ही हैं जो मनुष्य अपनी गलतियों पर काबू पा सकता है वही मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति भी कर सकता है।

6- आपात स्थिति में मन को डगमगाना नहीं चाहिए।

7- खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है।

8- अज्ञानी कर्म का प्रभाव खत्म करने के लिए लाखों जन्म लेता है जबकि आध्यात्मिक ज्ञान रखने और अनुशासन में रहने वाला व्यक्ति एक क्षण में उसे खत्म कर देता है।

Mahavir Jayanti 2019 Wishes, Images & Greeting

भगवान महावीर ने पूरी दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। आज यानि 17 अप्रैल उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनके द्वारा दिए गए संदेशों और विचारों को फेसबुक, वॉट्सऐप पर अपने दोस्तों और प्रियजनों को भेजकर उन्हें विश कर सकते हैं। जिसका थोड़ा सा भी भाग अमल कर लिया जाए तो जीवन के सारे दुख चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी।

आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है
असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं
वो शत्रु हैं क्रोध, घमंड , लालच, आसक्ति और घृणा

जीव हत्या ना करें, किसी को ठेस न पहुंचाएं
अहिंसा ही सबसे महान धर्म है
सभी जीवों के प्रति सम्मान अहिंसा है
प्रत्येक आत्मा स्वयं में सर्वज्ञ और आनंदपूर्ण है
आनंद बाहर से नहीं आता
शांति और आत्म-नियंत्रण अहिंसा है

महावीर जिनका नाम है
पालीताना जिनका धाम है
अहिंसा जिनका नारा है
ऐसे त्रिशला नंदन को प्रणाम हमारा है
महावीर जयंती की शुभकामनाएं

अरिहंत की बोली
सिद्धों का सार
आचार्यों का पाठ
साधुओं का साथ
अहिंसा का प्रचार

पांच सिद्धांत

मोक्ष पाने के बाद, भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत लोगों को बताए जो समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाने वाले बताये जाते हैं। ये पांच सिद्धांत इस प्रकार हैं, पहला अहिंसा, दूसरा सत्य, तीसरा अस्तेय, चौथा ब्रह्मचर्य और पांचवा व अंतिम सिद्धांत है अपरिग्रह। इसी तरह किंवदंती है कि महावीर जी के जन्म से पूर्व उनकी माता जी ने 16 स्वप्न देखे थे जिनके स्वप्न का अर्थ राजा सिद्धार्थ द्वारा बतलाया गया है।

Posted By: Nitesh