नई दिल्ली, जेएनएन। सोमवार को होली है। होली पर फिल्म शोले के लोकप्रिय गीत 'होली के दिन दिल खिल जाते हैं..दुश्मन भी गले मिल जाते हैं' जैसे गानों पर थिरकते हुए लोग सबकुछ भूलकर जमकर रंग खेलते हैं। परंतु, पिछली बार की तरह इस बार भी हमारा दुश्मन कोई इंसान नहीं, बल्कि अदृश्य वायरस है। यह वायरस दूसरी बार सिर उठाने लगा है, इसलिए होली के दिन दुश्मन तो क्या दोस्तों को भी गले नहीं लगाना है। दिल में उत्साह और दिमाग में कोरोना को रखते हुए पूरी सावधानी और दो गज की दूरी के साथ रंगोत्सव मनाना है। 

महामारी से बचाव के नियमों का पालन करते हुए खुद और अपनों का रखें ख्याल

कोरोना वायरस नामक यह दुश्मन एक बार फिर देश में सिर उठा रहा है। यह नए-नए रूप बदलकर हमारे सामने आ रहा है। यूं तो देश में कोरोना वायरस के सात सौ से ज्यादा स्वरूप पाए गए हैं, लेकिन हाल में मिले डबल म्यूटेंट वैरिएंट और ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में मिले वायरस के नए प्रकार ज्यादा खतरनाक हैं। महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पिछले एक पखवाड़े से संक्रमण के मामले ज्यादा तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक में तो महामारी की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी है। 

कई राज्‍यों में सामूहिक रूप से होली मनाने पर रोक 

कई राज्यों में होली के त्योहार पर रोक लगा दी गई है। महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में धारा 144 लागू कर दी है, जिसके तहत एक स्थान पर पांच से ज्यादा लोगों के जमा होने पर रोक लगा दी गई है। राज्य में होलिका दहन पर भी रोक लगा दी गई है। दूसरे अन्य कई राज्यों में एहतियात के साथ होलिका दहन की अनुमति तो है, लेकिन रंग खेलने पर पाबंदी लगा दी गई है। ये सही बात है कि उमंग और उत्साह के त्योहार होली में सारी बंदिशें टूट जाती हैं। लेकिन वर्तमान हालात पूरी तरह से अलग हैं। 

चीन के वुहान से निकला वायरस देश में फिर उठा रहा सिर, सतर्कता और सावधानी के साथ मनाएं रंगोत्सव

रंग, गुलाल और मस्ती के साथ त्योहार मनाते समय कोरोना महामारी के संकट को भी ध्यान में रखना है। चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस की दूसरी लहर को मात देने के लिए हमें दोस्तों के साथ दुश्मनों को भी गुलाल तो लगाना हैं पर किसी के गले नहीं लगना है। 'अदृश्य दुश्मन' हमारे गले न पड़ जाए, इसलिए दोस्तों को भी दूर से ही शुभकामनाएं देनी हैं। महामारी के बढ़ते संकट के बीच हमें एक-दूसरे के पास नहीं जाना है, दूर रहकर ही दुआ करनी है। 

कोरोना से बचाव के सभी नियमों का पालन करते हुए हमें अपने और अपनों की खुशी का ध्यान रखना है। हर त्योहार के पीछे कोई न कोई सीख छिपी होती है। होली का त्योहार भी सामूहिकता की सीख देता है। यह बताता है कि हमें सिर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि अपने साथ जुड़े समाज के हर व्यक्ति की खुशियों की चिंता करनी है। इसलिए दूर रहकर त्योहार मनाते समय अपने अंदर के उमंग और उत्साह को कम नहीं होने दें। 

 

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