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'शक्ति' से 'अरावली' तक का सफर... हेलीकॉप्टर इंजन निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता का ब्लूप्रिंट तैयार

By Shubham KumarEdited By: Shubham Kumar
Published: Wed, 07 Oct 2026 01:23 PM (IST)Updated: Wed, 07 Oct 2026 02:00 PM (IST)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एचएएल कोरापुट में शक्ति हेलीकॉप्टर इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन का उद्घाटन किया, जिससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता मजबूत हुई है।

(एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)

(एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. एचएएल कोरापुट में शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन का उद्घाटन।

  2. यह सुविधा प्रति वर्ष 100 शक्ति इंजन का उत्पादन करेगी।

  3. 'अरावली' और 'HTSE-1200' जैसे भविष्य के इंजन पर भी काम जारी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को एक और बड़ी मजबूती मिली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के ओडिशा स्थित कोरापुट डिवीजन में शक्ति हेलीकॉप्टर इंजन की दूसरी नई उत्पादन लाइन का उद्घाटन किया है। इस खास मौके पर इस फैसिलिटी से 2000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी का मील का पत्थर भी हासिल किया गया।

बता दें कि करीब 218 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह आधुनिक फैसिलिटी 2028-29 तक पूरी तरह से चालू हो जाएगी। इसके शुरू होने से हर साल लगभग 100 'शक्ति' इंजनों का उत्पादन किया जा सकेगा।

किन हेलिकॉप्टरों को मिलेगी ताकत?

इस बात को ऐसे समझिए कि यह इंजन भारत के स्वदेशी हेलिकॉप्टरों जैसे एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (ध्रुव), लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (प्रचंड) और आने वाले लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर को शक्ति प्रदान करेगा।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

इसके अलावा नई उत्पादन लाइन के उद्घाटन के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों को बधाई दी। उन्होंने जोर दिया कि कोरापुट को केवल इंजन बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे एक बड़े एयरोस्पेस प्रोपल्शन इकोसिस्टम के रूप में विकसित करना चाहिए।

भारत के हेलीकॉप्टर इंजन सफर की कहानी

गौरतलब है कि भारत का एयरो-इंजन सफर विदेशी लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से शुरू होकर अब संयुक्त विकास और स्वदेशी डिजाइन तक पहुंच गया है। बात अगर शक्ति इंजन की करें तो, यह फ्रांस की कंपनी Safran के Ardiden 1H1 इंजन का भारतीय संस्करण है, जिसे HAL और Safran ने मिलकर भारत की गर्म और ऊंचे पहाड़ी इलाकों की मुश्किल परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। यह वर्तमान में ध्रुव, रुद्र और प्रचंड हेलिकॉप्टरों की ताकत है।

अगला कदम- अरावली इंजन

दूसरी ओर भविष्य की बड़ी तैयारियों के तहत, HAL और Safran के 50:50 साझा उद्यम ने 'अरावली' नामक एक अधिक शक्तिशाली 3500 से 4000 shp टर्बोशाफ्ट इंजन के विकास का अनुबंध किया है। यह इंजन भविष्य के 'इंडियन मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर' और नेवी के 'डेक-बस्ड मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर' में लगाया जाएगा।

स्वदेशी- HTSE-1200

इसके अलावा, HAL का एयरो इंजन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर 3.5 से 6.5 टन श्रेणी के हेलिकॉप्टरों के लिए पूरी तरह से भारतीय डिजाइन वाले 'HTSE-1200' इंजन पर भी काम कर रहा है।

Su-30MKI के इंजनों का भी बढ़ेगा उत्पादन

गौरतलब है कि कोरापुट डिवीजन का इतिहास काफी पुराना रहा है। 1964 में स्थापित इस यूनिट ने MiG-21, MiG-27, MiG-29 और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों के लिए 9000 से अधिक इंजनों का ओवरहॉल किया है।

ऐसे में अब रक्षा मंत्री ने घोषणा की कि Su-30MKI विमानों के लिए इस्तेमाल होने वाले AL-31FP इंजनों की उत्पादन क्षमता को हर साल 30 से बढ़ाकर 50 यूनिट किया जाएगा, जिसके लिए 335 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। सप्लाई चेन की चुनौतियों के बावजूद HAL अपने लक्ष्यों को समय पर पूरा कर रहा है।