गुवाहाटी। गुवाहाटी में हुई शर्मनाक घटना ने इस मासूम लड़की को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। उसने देश के प्रधानमंत्री और असम मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से गुहार लगाई है कि उसकी आबरू को सरेबाजार नीलाम करने वाले सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए। ताकि फिर कभी कोई किसी लड़की के साथ ऐसी हरकत न करे। उसने कहा कि मैं रो रही थी, गिड़गिड़ा रही थी, लेकिन किसी ने मेरी एक न सुनी। उन्हें मेरे ऊपर जरा भी दया नहीं आई। वहां मीडिया वाले भी थे, मैंने उनसे भी मदद मांगी, लेकिन वे खाली वीडियो ही बनाते रहे। लोगों ने मेरे कपड़े फाड़े और मुझे मारा। भगवान कभी किसी लड़की के साथ ऐसा मत होने देना। लड़की की पहचान छिपाकर रखी गई है। उसने बताया कि वह एक बर्थडे पार्टी से घर लौट रही थी और शराब पिए हुए कुछ लड़कों ने उसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

देश के साक्षर राज्यों में से एक असम में एक ऐसी घटना सामने आई है जो हमारी संवेदनशीलता को झकझोर कर रख देती है और जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या इंसान इस हद तक घिनौनी हरकत कर सकता है?

गुवाहाटी के व्यस्त इलाकों में से एक जीएस रोड पर क्लब मिंट के सामने लड़की को 20 लोगों ने सरेआम न सिर्फ बेइज्जत किया, बल्कि उसके बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा। जब इससे भी जी न भरा तो इस छात्रा के कपड़े तक फाड़ डाले गए। वहां मौजूद भीड़ के लिए ये एक तमाशा था, सब छात्रा की बेइज्जती देखते रहे लेकिन किसी ने इसे बचाने की कोशिश नहीं की। आखिर में पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रा को किसी तरह से इन गुंडों के चंगुल से छुड़ाया। 8 जुलाई की रात ये वारदात हुई लेकिन पुलिस ने कार्रवाई की 3 दिन बाद यानी 11 जुलाई को। अब भी सिर्फ चार आरोपी ही गिरफ्तार हुए हैं बाकी 16 अब भी गिरफ्त से बाहर हैं। वीडियो फुटेज देखने के बाद पता चला कि राज्य सरकार की आईटी एजेंसी एमट्रॉन का एक कर्मचारी अमरज्योति कलिता भी लड़की को बेइज्जत करने वाली भीड़ में शामिल था। कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया।

यह घटना हमें अपने संस्कारों के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर करती है। वे संस्कार जिन्हें हम तथाकथित तौर वंश को आगे बढ़ाने वाले लड़कों को देते हैं। वे लड़के जिनके पैदा होने पर हम थाली बजाते हैं और मोहल्ले में लड्डू बांटते हैं। क्या यही दिन देखने के लिए माता-पिता लड़कों के पैदा होने पर खुशियां मनाते हैं?

यह सोमवार की घटना है, जो हमारे देश की लापरवाह पुलिस की बदौलत अब सामने आई है। वो भी एक पत्रकार की बदौलत। अगर उसने इन वैहशी लड़कों के चेहरों को अपने कैमरों में कैद न किया होता तो शायद इस लड़की के लिए इंसाफ की आवाज तक न उठती। इन लड़कों को मर्दानगी का इतना गुरूर कैसे मिलता है कि इनके अंदर इतनी हिम्मत पैदा हो जाती है वह राह चलती किसी भी लड़की के साथ छेड़खानी कर सकें। कितनी सहम चुकी होगी वह लड़की जिसकी इज्जत को इन लड़कों ने तार-तार कर दिया। क्या कभी वह फिर से सामान्य जिंदगी जी पाएगी? अगर जी पाएगी तो क्या उसे कभी किसी भी पुरुष पर भरोसा हो पाएगा? जरा पूछिए अपने दिल से और फिर घर में बैठकर अपने बेटों, पिता और पति की संवेदनशीलता टटोलें।

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