अहमदाबाद। गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड मामले के 24 दोषियों के लिए विशेष एसआइटी अदालत कल सजा का एेेलान करेगी। इस हत्याकांड में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोग मारे गए थे। सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त विशेष जांच दल (एसआइटी) ने 2002 की गुजरात हिंसा से जुड़े जिन नौ मामलों की जांच की थी, यह उनमें से एक है।

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दो जून को अदालत के विशेष जज पीबी देसाई ने 11 लोगों को हत्या और अन्य अपराधों का, जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य समेत 13 अन्य को कम गंभीर अपराधों का दोषी पाया था। 36 आरोपियों को इस मामले से बरी कर दिया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मामले के मुख्य आरोपी कैलाश धोबी ने 13 जून को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। उसे 2002 में गिरफ्तार किया गया था और उसकी अस्थायी जमानत अवधि इस साल फरवरी में खत्म हो गई थी। मुकदमे के दौरान 338 लोगों की गवाही हुई और चार विभिन्न जजों ने सुनवाई की। एसआइटी ने मामले में 66 लोगों को आरोपी बनाया था।

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एसआइटी के वकील और लोक अभियोजक आरसी कोडेकर ने बहस के दौरान सभी 24 दोषियों के लिए मृत्यु दंड या मृत्यु तक कारावास की सजा की मांग की। पीडि़तों के वकील एसएम वोरा ने मांग की कि हर अपराध के लिए सजा एक साथ न चले, जिससे दोषियों की पूरी जिंदगी जेल में कटे। जबकि दोषियों के वकील अभय भारद्वाज का कहना था कि यह घटना प्रतिक्रियात्मक थी और उकसाव के पर्याप्त कारण मौजूद थे।

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गौरतलब हैै कि अहमदाबाद स्थित गुलबर्ग सोसाइटी का यह हत्याकांड 28 फरवरी, 2002 को हुआ था। इससे एक दिन पहले गोधरा रेलवे स्टेशन के नजदीक साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच को आग लगा दी गई थी, जिसमें अयोध्या से लौट रहे 58 कारसेवकों की मौत हो गई थी।

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Posted By: Kamal Verma

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