अहमदाबाद। गुजरात के फर्जी मुठभेड़ कांडों के सात साल से जेल में बंद आइपीएस अधिकारी डीजी वंजारा शनिवार को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

निलंबित आइपीएस अधिकारी वंजारा 34 साल तक पुलिस सेवा में रहे। वह यहां साबरमती केंद्रीय जेल में हैं और यही सेवानिवृत्त भी होंगे। जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हम लोगों को मालूम है कि वह 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हालांकि, सेवानिवृत्ति के आखिरी दिन उन्हें विदाई देने का कोई कार्यक्रम नहीं है। वंजारा को राज्य की सीआइडी ने वर्ष 2007 के मार्च में सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय वंजारा डीआइजी के रूप में तैनात थे। बाद में वंजारा को इशरत जहां, तुलसीराम प्रजापति, सादिक जमाल और अन्य फर्जी मुठभेड़ मामले में भी अभियुक्त बनाया गया। हाल में अभय चुड़ास्मा, राजकुमार पांडियन जैसे उनके कुछ कनिष्ठ अधिकारियों को अदालत ने जमानत दे दी। वंजारा ने भी जमानत की अर्जी दी थी लेकिन सीबीआइ ने उनकी याचिका का मुंबई की अदालत में विरोध किया जिससे उन्हें जमानत नहीं मिली।

वर्ष 1980 में डीएसपी के रूप में पुलिस की नौकरी शुरू करने वाले वंजारा को वर्ष 1987 में आइपीएस अधिकारी के रूप में प्रोन्नति मिली। वह अहमदाबाद की अपराध शाखा में पुलिस उपायुक्त के भी रहे। बाद में वह प्रोन्नत हो कर अहमदाबाद में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के पुलिस उपमहानिरीक्षक बने। वर्ष 2013 के मई में वंजारा ने गुजरात के डीजीपी को नौकरी से इस्तीफा भेज दिया था। तब उन्होंने गुजरात के पूर्व गृह राज्यमंत्री अमित शाह पर खुद को व अन्य पुलिस अधिकारियों को फर्जी मुठभेड़ कांड में बलि का बकरा बनाने का आरोप लगाया था। उस पत्र में वंजारा ने मोदी को ऐसा देवता करार दिया था जो शाह के प्रभाव में है। वंजारा का इस्तीफा तब गृह विभाग ने स्वीकार नहीं किया था। एक वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी ने बताया कि वंजारा निलंबित हैं इसलिए उन्हें अभी कितनी पेंशन दी जाएगी यह गृह विभाग तय करेगा।

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