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GST अधिकारियों से छिनीं गिरफ्तारी की शक्तियां, रजिस्ट्रेशन से रिटर्न और रिफंड तक की बदली प्रक्रिया; पूरी डिटेल

Published: Thu, 08 Oct 2026 11:27 PM (GMT+05:30)

जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। अब जीएसटी अधिकारी बिना कोर्ट आदेश के गिरफ्तारी ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पिछले साल सितंबर में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में बदलाव कर सरकार ने ग्राहकों को बड़ी राहत दी थी। ठीक एक साल बाद गुरुवार को जीएसटी कानून के दुरुपयोग व उनकी जटिलताओं से परेशान कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में मुख्य रूप से रजिस्ट्रेशन, रिफंड और रिटर्न से जुड़े मामले में राहत देने की कोशिश की गई।

बड़ा फैसला यह रहा कि अब जीएसटी अधिकारी कारोबारियों को जीएसटी कानून का हवाला देकर उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे, इसके लिए उन्हें कोर्ट से आदेश लेना होगा।

पांच करोड़ से अधिक जीएसटी बकाया पर कार्रवाई 

पांच करोड़ से अधिक का जीएसटी बकाया होने पर ही किसी कारोबारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी। अभी यह सीमा एक करोड़ की थी। ये सारे फैसले अगले वित्त वर्ष से लागू होंगे और इस संबंध में जल्द ही अधिसूचना जारी होगी।

अभी तक मामूली रकम के लिए कारोबारियों को नोटिस भेज दिया जाता था और वे जीएसटी अधिकारी व दफ्तर के चक्कर लगाते रहते थे। अब 10,000 रुपये से कम के बकाये पर कोई नोटिस नहीं भेजा जाएगा और इस प्रकार के पूर्व में भेजे गए नोटिस को भी वापस ले लिया गया है। इससे 12 लाख से अधिक कारोबारियों को राहत मिलेगी।

एक बड़ा फैसला यह भी हुआ कि जीएसटी अधिकारी एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले माल को कहीं भी चेकिंग के लिए नही रोक सकेंगे। अगर दिल्ली से माल बिहार जा रहा है तो सिर्फ दिल्ली या बिहार में ही उस गाड़ी को चेकिंग के लिए रोका जा सकता है। यह अधिकार भी विशेष टीम को ही होगा।

अभी जीएसटी अधिकारी एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाली गाड़ी को कहीं भी रोक लेते हैं, जिससे माल व्यापारियों को काफी परेशानी होती है।

छोटे बकायों पर अब कोई नोटिस नहीं भेजा जाएगा

अभी बिना जोखिम वाले जीएसटी रजिस्ट्रेशन का काम तीन दिन में हो रहा है और इस काम में किसी अधिकारी की मदद नहीं ली जाती है। अब आवेदन को इस प्रकार से तैयार किया गया है कि आवेदनकर्ता को किसी की मदद की जरूरत नहीं होगी। आवेदन से ही उन्हें पता चल जाएगा कि उन्हें क्या-क्या दस्तावेज देना है।

रिटर्न में मामूली अंतर होने पर साल में करीब 95,000 कारोबारियों को सिस्टम से जेनरेटेड नोटिस भेजा जाता है। रिटर्न की रकम में 0.8 प्रतिशत अंतर होने पर भी कारोबारियों को नोटिस भेज दिया जाता है। यह नोटिस मामूली चीजों के लिए होता है।

अब इस प्रकार की गलती को सुधारने का मौका दिया जाएगा। पंजीयन नंबर गलत होने पर भी नोटिस आ जाता था, अब इसे भी दोबारा ठीक करने का मौका दिया जाएगा। जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी रेट को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई।

रिफंड क्लेम स्वीकारने की अवधि भी 15 की बजाय 10 दिन

रिफंड क्लेम को स्वीकारने की अवधि को 15 दिन से कम करके 10 दिन कर दिया गया है। अगर 10 दिनों के भीतर जीएसटी विभाग से कोई प्राप्ति नहीं होती है तो यह मान लिया जाएगा कि सरकार ने कारोबारी के रिफंड दावे को स्वीकार लिया है। जोखिम वाले क्लेम को भी अब अधिकारी की जगह सिस्टम देखेगा।

रिफंड में तेजी से कारोबारियों की कार्यशील पूंजी का प्रवाह बना रहेगा। लंबे समय तक रिफंड फंसने से छोटे कारोबारियों को काफी दिक्कतें होती है। सीजीएसटी के लिए इनकम टैक्स प्रणाली की तरह ही फेसलेस सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। इस दायरे में करीब 70 लाख कारोबारी आएंगे।

जीएसटी बैठक में यह अहम फैसले भी लिए गए

  • सामान्य जुर्माना 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये किया गया।
  • टैक्स डिमांड 10,000 रुपये से कम होने पर कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
  • ई-कामर्स प्लेटफार्म पर छोटे विक्रेताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया सरल होगी।
  • जीएसटी दरों में बदलाव पर साल में एक बार विचार किया जाएगा।
  • जोखिम आकलन के आधार पर ज्यादातर रिफंड तीन कार्य दिवस में मंजूर किए जाएंगे।
  • आपूर्तिकर्ता की ओर से कर का भुगतान न किए जाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) से जुड़े मामलों की जांच के लिए अधिकारियों की समिति बनेगी। यह तीन महीने में रिपोर्ट सौंपेगी।
  • प्लांट और मशीनरी तथा इनपुट सेवाओं पर जमा आइटीसी का रिफंड अब उपलब्ध होगा।
  • नियोक्ता कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर आइटीसी का दावा कर सकेंगे।
  • माल ले जा रहे वाहनों को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।