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भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत, अत्याधुनिक गश्ती पोत 'श्रेयस' लॉन्च; समुद्री लूट और घुसपैठ करेगा नाकाम

Published: Sat, 10 Oct 2026 04:20 PM (IST)

कोलकाता स्थित जीआरएसई ने भारतीय नौसेना के लिए अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत 'श्रेयस' का जलावतरण किया, जो चार पोतों की श्रृंखला में तीसरा है।

HighLights

  1. जीआरएसई ने 'श्रेयस' NGOPV का कोलकाता में जलावतरण किया।

  2. यह भारतीय नौसेना के लिए तीसरा अत्याधुनिक गश्ती पोत है।

  3. समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमता को मजबूती देगा 'श्रेयस'।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमता को मजबूती देने की दिशा में कोलकाता स्थित गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने शनिवार को अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) 'श्रेयस' का जलावतरण किया।

यह भारतीय नौसेना के लिए जीआरएसई द्वारा निर्मित चार पोतों की शृंखला का तीसरा युद्धपोत है। रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जीआरएसई ने रिकार्ड पांच महीने से भी कम समय में इस शृंखला के तीन पोतों का जलावतरण कर परियोजना में तेजी दिखाई है।

कोलकाता में जीआरएसई के राजाबगान डकयार्ड में आयोजित समारोह में भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनकी पत्नी रेयमान कोचर ने पारंपरिक रूप से युद्धपोत का जलावतरण व इसका नामकरण किया।

इस अवसर पर जीआरएसई और भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। जलावतरण के बाद फिलहाल ये पोत समुद्र में विभिन्न परीक्षण के दौर से गुजरेगा। इस पोत में अत्याधुनिक सेंसर और अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। परीक्षण प्रकिया पूरी होने के बाद इसे नौसेना को सौंपा जाएगा।

GRSE

113 मीटर लंबा और 3000 टन वजनी है युद्धपोत

अधिकारियों ने बताया कि 'श्रेयस' करीब 113 मीटर लंबा और 14.6 मीटर चौड़ा है। इसका वजन करीब 3,000 टन है और यह अधिकतम 23 नाट की गति से चल सकता है। 14 नाट की परिभ्रमण गति पर इसकी परिचालन दूरी 8,500 समुद्री मील तक होगी।

पहले निर्मित अपतटीय गश्ती पोतों की तुलना में ये नए पोत अधिक बड़े और सक्षम हैं। इनमें बेहतर सहनशक्ति, मारक क्षमता और विभिन्न प्रकार के अभियानों को अंजाम देने की क्षमता होगी।

इन युद्धपोतों का इस्तेमाल तटीय और अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, समुद्री निगरानी, संदिग्ध जहाजों को रोकने और उनकी तलाशी लेने, समुद्री खदानों से जुड़े अभियानों तथा विशेष अभियानों में किया जाएगा। इसके अलावा समुद्री डकैती विरोधी कार्रवाई, घुसपैठ रोकने, मानवीय सहायता, आपदा राहत, खोज एवं बचाव अभियानों और जरूरत पड़ने पर अस्पताल संबंधी सेवाओं में भी इनकी भूमिका होगी।

जीआरएसई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कमोडोर पीआर. हरि ने कहा कि नई पीढ़ी के ये पोत आकार, समुद्र में लंबे समय तक अभियान चलाने की क्षमता, विस्थापन तथा उपकरणों और हथियारों के मामले में पहले के अपतटीय गश्ती पोतों से अधिक उन्नत हैं।

इस शृंखला के पहले पोत 'संघमित्रा' का जलावतरण 20 मई 2026 को और दूसरे पोत 'श्रुति' का 11 अगस्त 2026 को हुआ था। 'श्रेयस' के जलावतरण के साथ जीआरएसई ने भारतीय नौसेना के 11 पोतों वाले एनजीओपीवी कार्यक्रम के तहत अपने चार पोतों की परियोजना में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है।

तीसरे पोत के जलावतरण पर वाइस एडमिरल ने की जीआरएसई की सराहना

इस अवसर पर वाइस एडमिरल अजय कोचर ने पांच महीने से कम समय में तीसरे पोत के जलावतरण पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह उपलब्धि जीआरएसई में चौबीसों घंटे किए जा रहे परिश्रम के साथ भारतीय युद्धपोत निर्माण व्यवस्था की बढ़ती गति, क्षमता और मजबूती को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे समुद्री राष्ट्र के लिए क्षेत्र में निरंतर और विश्वसनीय समुद्री उपस्थिति बनाए रखना आवश्यक है। देश की लंबी तटरेखा, विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और समुद्र पर निर्भर आर्थिक एवं ऊर्जा हितों के कारण ऐसे पोतों का महत्व बढ़ जाता है।