ब्रीडिंग सेंटर से खुले आसमान में छोड़े गए गोडावण पक्षी, भूपेंद्र यादव बने साक्षी
गोडावण को पुनर्वास के लिए डेजर्ट नेशनल पार्क में दो एनक्लोजर बनाए गए हैं। री-वाइल्डिंग एवियरी में लंबे समय तक ...और पढ़ें

ब्रीडिंग सेंटर से खुले आसमान में छोड़े गए गोडावण पक्षी, भूपेंद्र यादव बने साक्षी
HighLights
दुनिया के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल है राजस्थान का राज्य पक्षी
अत्याधुनिक जीपीएस टैग से पल-पल होगी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की निगरानी
जागरण संवाददाता, जयपुर। दुनिया के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण की दिशा में राजस्थान सरकार का प्रयास जारी है।
इसी क्रम में जैसलमेर के रामदेवरा में गोडावण पक्षियों के लिए नवनिर्मित पुनर्वास एवं प्रकृति पुनर्स्थापना केंद्र का शनिवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोधपुर से वर्चुअल उद्घाटन किया।
इस दौरान जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क स्थित सुदासरी क्षेत्र में गोडावण पक्षियों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि गोडावण संरक्षण के लिए पिछले एक दशक से किए जा रहे प्रयासों और वैज्ञानिक अनुसंधान का यह परिणाम है।
गोडावण को पुनर्वास के लिए डेजर्ट नेशनल पार्क में दो एनक्लोजर बनाए गए हैं। री-वाइल्डिंग एवियरी में लंबे समय तक रखने के बाद अब इन्हें पूर्ण रूप से स्वच्छंद विचरण के लिए खुले वातावरण में छोड़ा गया।
खुले में छोड़ने से पहले सभी गोडावण पक्षियों पर अत्याधुनिक जीपीएस टैग लगाए गए हैं। इनके माध्यम से वन विभाग 24 घंटे उनकी गतिविधियों पर निगरानी रख सकेगा।
गोडावण कितनी दूरी तक उड़ान भर रहे हैं, वे कहां-कहां अपना भोजन तलाश रहे हैं और किन इलाकों को वे अपने सुरक्षित ठिकाने के रूप में चुन रहे हैं, इन तमाम अहम गतिविधियों की पल-पल मॉनिटरिंग की जाएगी। यदि कोई गोडावण संकटग्रस्त क्षेत्र या हाईटेंशन बिजली लाइन की ओर बढ़ता है तो तत्काल बचाव दल को सक्रिय किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि गोडावण राजस्थान का राज्य पक्षी भी है। कार्यक्रम में राज्य के वन मंत्री संजय शर्मा मौजूद रहे, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
साल में मात्र एक अंड़ा देती है यह पक्षी
रामदेवरा और सुदासरी ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम गर्भाधान से तीन चूजों का जन्म हुआ है। इसके साथ ही कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण की संख्या बढ़कर 76 हो गई है।
डेजर्ट नेशनल पार्क के वन अधिकारी बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि गोडावण संरक्षण में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि हाल में रामदेवरा सेंटर में एक और सुदासरी में दो चूजों का जन्म हुआ।
इन्हीं गोडावण को खुले वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब रामदेवरा में 52 और सुदासरी में 24 गोडावण पक्षी हैं। मादा गोडावण प्राकृतिक रूप से साल में केवल एक अंडा देती है और उसके सुरक्षित बचने की संभावना भी कम होती है।
ऐसे में वैज्ञानिक तकनीक के जरिये इनकी संख्या बढ़ाना संरक्षण प्रयासों में अहम माना जा रहा है। देश में अब गोडावण पक्षियों की संख्या 150 हो गई है। जिनमें से सबसे अधिक 76 राजस्थान के जैसलमेर में हैं
