जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। खाद्यान्न संकट और मंहगाई से बुरी तरह जूझ रहे पाकिस्तान अब टिड्डियों से निपटने के लिए भारत से उम्मीद लगाए बैठा है। शायद यही कारण है कि पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 और 35ए निरस्त होने के बाद भारत से सभी कूटनीतिक व व्यापारिक संबंध खत्म करने वाले पाकिस्तान ने टिड्डियों की समस्या से निपटने के लिए भारत के साथ सहयोग का हाथ बढ़ाया है और भारत ने भी उसे निराश नहीं किया है।

टिड्डियों से निपटने की रणनीति तय करने के लिए दोनों देशों के बीच पांच दौर की बातचीत भी हो चुकी है। गौरतलब है कि 2019 में टिड्डियों ने रबी फसलों पर 20 साल बाद सबसे भयंकर हमला किया। इससे पाकिस्तान में हजारों एकड़ की फसल बर्बाद हो गई। पाकिस्तान के बाद टिड्डियों ने सीमा पार कर भारत में भी प्रवेश कर लिया। लेकिन अत्याधुनिक तकनीकी और जमीनी स्तर पर विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के बल पर भारत टिड्डियों को सीमावर्ती जिलों में ही रोकने में सफल रहा। इससे टिड्डियों का दल भारत के अंदरूनी इलाके में प्रवेश नहीं कर पाया।

टिड्डियों के कारण पाकिस्तान में रोटी की संकट

यदि समय रहते टिड्डियों को नहीं रोका जाता, तो वे बांग्लादेश तक सारी फसलों को चट कर जातीं। पाकिस्तान के लिए समस्या यह है कि वह खाद्यान्न की कमी की पहले जूझ रहा है। टिड्डियों के आक्रमण के बाद रबी की फसलें बर्बाद होने से वहां हालात बेकाबू हो गए हैं। यही कारण है कि टिड्डियों की समस्या को लेकर पाकिस्तान को नेशनल इमरजेंसी घोषित करनी पड़ गई। गेंहू की कमी और उसकी बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए पाकिस्तान तीन लाख टन गेंहू का आयात कर रहा है। लेकिन इसके बावजूद वहां की बड़ी आबादी के लिए दो समय की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है।

जून में फिर हो सकता है टिड्डियों का हमला

वैज्ञानिकों के इस साल जून में पिछले साल से भी कहीं व्यापक पैमाने पर टिड्डियों के आक्रमण की आशंका जताई है, जिससे निपटने में पाकिस्तान खुद को बेबस पा रहा है। वहीं भारत इस साल और बेहतर तैयारियों के साथ मुकाबले के तैयार कर रहा है। इसके लिए कई उपकरण, जरूरी दवाएं, गाडि़यों और 60 अतिरिक्त स्प्रेयर खरीदे जा रहे हैं। टिड्डियों पर दवाओं के हवाई छिड़काव की क्षमता को बढ़ाने के लिए गृह, रक्षा, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ समन्वय का काम शुरू हो चुका है।

टिड्डियों रोकना दुनिया के सामने बड़ी चुनौती

यूएन ने चेताया है कि अफ्रीकी महाद्वीप के टिड्डी वाले इलाके में अप्रैल तक इनकी एक और पीढ़ी हमले को तैयार होगी और जून तक इनकी आबादी अभी के 360 अरब की तुलना में 500 गुना होगी। इससे बड़े अन्न संकट और भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती इनकी आबादी बढ़ने से रोकना है। टिड्डियों से निपटने का सबसे कारगर तरीका कीटनाशक का छिड़काव है। लेकिन अफ्रीकी देश इन विमानों की कमी से जूझ रहे हैं। भारत में कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन की मदद भी ली गई।

40 फीसद खेती नष्ट हो चुकी है पाकिस्तान में।

1.30 करोड़ आबादी ईस्ट अफ्रीका में भुखमरी के करीब

कितनी खतरनाक है टिड्डी

टिड्डी आमतौर पर पत्तियां, फूल, फल, बीज, छाल और पौध की कोपल खाकर फसलों को नष्ट करती है। सबसे विनाशकारी रेगिस्तानी टिड्डी है, जो इन दिनों दुनियाभर में चिंता का सबब बनी हुई है। यह एक दिन में अपने वजन के बराबर (2 से 2.5 ग्राम) पत्तियां-बीज खा जाती हैं। एक वर्ग किलोमीटर में करीब 40 लाख टिड्डियां होती हैं। यह झुंड एक दिन में खेतों को उतना नुकसान पहुंचाता है, जो 35 हजार इंसानों का एक दिन में पेट भर सकता है।

जानें- टिड्डियों के जीवनचक्र के बारे में

90 दिन का कुल जीवनकाल

50 दिन में वयस्क हो जाती है

12-6 किमी/घंटे की स्पीड से उड़ती हैं

150 किमी तक उड़ जाती हैं एक दिन में

30 दिन अंडे देते हैं और फिर खत्म  

Posted By: Sanjeev Tiwari

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