नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। एयर इंडिया ने मंगलवार को कड़ी कार्रवाई करते हुए दस हड़ताली पायलटों को बर्खास्त कर दिया। हड़ताली पायलटों की यूनियन इंडियन पायलट गिल्ड की मान्यता भी रद कर उसके दफ्तर सील कर दिए गए। सरकारी विमानन कंपनी के करीब दो सौ पायलट बीमारी का बहाना बनाकर सोमवार रात से ड्यूटी पर नहीं आए हैं। इसकी वजह से एयर इंडिया को 13 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद करनी पड़ीं और मुसाफिरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

हड़ताली पायलट ड्रीमलाइनर बोइंग 787 विमान उड़ाने का प्रशिक्षण देने और प्रोन्नति के अवसर व सुविधाएं बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं। पायलटों और प्रबंधन के बीच मंगलवार को केंद्रीय श्रमायुक्त कार्यालय में हुई वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने हड़ताल को गैरकानूनी करार देते हुए पायलटों से कहा है कि वे तय करें कि एयर इंडिया को चलाना है या बंद करना है।

हड़ताली पायलट ड्रीमलाइनर बोइंग विमानों को उड़ाने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में उस बदलाव को लेकर खफा हैं जिसके तहत पूर्ववर्ती एयर इंडिया के अलावा इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को भी इन विमानों को उड़ाने का प्रशिक्षण देने का फैसला किया गया है। इंडियन एयरलाइंस के इन पायलटों में ज्यादातर इंडियन कॉमर्शियल पायलट एसोसिएशन [आइसीपीए] के सदस्य हैं। जबकि, पूर्ववर्ती एयर इंडिया के पायलटों का संबंध इंडियन पायलट गिल्ड [आइपीजी] से है, जिसने यह हड़ताल बुलाई है। आइपीजी पायलट इस मांग पर भी अड़े हैं कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में उन्हें फ‌र्स्ट क्लास में मुफ्त सफर करने की सुविधा दी जाए। इन मांगों पर सोमवार को मुंबई में एयर इंडिया प्रबंधन की आइपीजी के पदाधिकारियों के साथ वार्ता भी विफल रही थी।

हड़ताल के कारण मंगलवार को दिल्ली, मुंबई से एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 13 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद करनी पड़ीं। इनमें दिल्ली-शिकागो, दिल्ली-टोरंटो, दिल्ली-सिंगापुर, मुंबई-न्यूयार्क, मुंबई-हांगकांग और खाड़ी देशों की उड़ानें शामिल हैं। जिन पायलटों को बर्खास्त किया गया है उनमें ज्यादातर आइपीजी के पदाधिकारी हैं। आइपीजी के पदाधिकारी कैप्टन तौसीफ मुकादम ने कहा कि 2007 में विलय के बाद सरकार एयर इंडिया पायलटों के कैरियर पर समग्र नीति लाने में विफल रही है जिससे एयर इंडिया पायलटों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।

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