नई दिल्ली। देश की जनता आज शाम एक ऐतिहासिक समझौते की गवाह बनी। यह शांति समझौता नगालैंड के अलगाववादी गुट एनएससीएन और केंद्र सरकार के बीच हुआ। इस मौके पर एनएससीएन [आईएम] के मुखिया टी. मुइवा मौजूद थे। सरकार व गुट के बीच फिलहाल संघर्ष विराम था। नगालैंड में स्थायी शांति के लिए यह एक बहुत बड़ा कदम है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि नागा के उज्जवल भविष्य को साकार करने के लिए हम पूरी शक्ति लगा देंगे। पीएम ने कहा कि मैंने अपने अधिकारियों से कहा कि वे इस पर नजर रखें और मैंने स्वयं इसमें रुचि ली। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज मैं नगालैंडवासियों से कहना चाहूंगा कि आपकी काबिलियत, परंपरा और प्रयास से देश को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज इस बात के हम एक समस्या के अंत के तौर पर नहीं देख रहे हैं, बल्कि एक नए भविष्य की शुरूआत मान रहे हैं। उत्तर-पूर्व के राज्यों में शांति, सुरक्षा और आर्थिक विकास हमारे उच्च प्राथमिकताओं में रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नगा लोगों की भावनाओं को लेकर संवेदनशील थे। उन्होंने कहा कि नगा लोगों की अद्भुत संस्कृति से मैं बेहद प्रभावित हूं और शांति के लिए नगा नेताओं के प्रयासों की मैं भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं।

पीएम ने कहा कि नागा लोगों की समस्याओं को सुलझाने में बहुत वक्त लग गया। यह सब ब्रिटिशों द्वारा बनाए गए नियम-कानून की वजह से हुआ। उनके द्वारा बनाए गए नियमों की वजह से हम एक-दूसरे को समझ नहीं पाए। इसके लिए पीएम ने टी थूइवा को भी धन्यवाद दिया।

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पीएम ने इसका श्रेय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को देते हुए उन्हें धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि हमारे साथ राजनाथ सिंह को शुक्रिया जिन्होंने मुझे इसके लिए सलाह दी और सहयोग दिया।

ऐतिहासिक समझौते के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से समस्या के समाधान में लंबा समय लगा। संवाद की कमी से यह लगभग छह दशकों तक लटका रहा। उन्होंने समझौते को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि नगालैंड पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत है। वहां के लोगों ने शांति के लिए प्रयास किए, उनका साहस सराहनीय है। उन्होंने कहा कि उनका उत्तर-पूर्व से गहरा रिश्ता है। नगालैंड के प्रति देश में भ्रम फैलाया गया। उन्होंने कहा कि समझौते में गृहमंत्री राजनाथ सिंह का प्रयास काबिलेतारीफ है।

समझौते की घोषणा से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक ट्वीट कर कहा था कि शाम साढ़े छह बजे आप एक अहम घटना के गवाह बनेंगे। इसके बाद इस समझौते का देश के सभी न्यूज चैनलों पर सीधा प्रसारण हुआ। जिसका गवाह पूरा देश बना।

आंतरिक और बाह्य मोर्चे पर कामयाबी

सोमवार की शाम प्रधानमंत्री आवास पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की मौजूदगी में हुए इस समझौते के साथ ही मोदी सरकार ने आंतरिक और बाह्य सुरक्षा दोनों ही मोर्चों पर एक बड़ी कामयाबी जोड़ दी। इससे देश की सबसे पुरानी अलगाववादी समस्या तो खत्म होगी ही, सीमावर्ती इलाके पर भारत की पकड़ भी मजबूत होगी।

नगा भावना को सम्मान

इस समझौते के जरिए भारत ने नगा लोगों की भावना और इच्छा को सम्मान देने के साथ ही नगालैंड के विशिष्ट इतिहास, संस्कृति और स्थिति को मान्यता दी है। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर ना सिर्फ मुइवा को मंच पर ठीक बगल की जगह दी, बल्कि हॉल में मौजूद एनएससीएन (आइएम) के शीर्ष नेतृत्व के अन्य नेताओं के पास जा कर उनसे हाथ भी मिलाया।

छह दशकों के संघर्ष का अंत

नगा उग्रवादी ग्रेटर नगालैंड की मांग पर अड़े थे। उनके बीच छह दशक से संघर्ष चल रहा था। मुइवा ने बताया कि 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहराव ने समझौते के लिए कदम उठाए थे। तब चर्चा शुरू हुई थी। नगा समस्या देश की आजादी के वक्त यानि 1947 से जारी थी।

समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद टी मुइवाने कहा कि यह प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच की वजह से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक मौके पर मैं ईश्वर का शुक्रिया करता हूं।

1980 के दशक में हुआ गठन

1980 के दशक में नगा नेशनल काउंसिल के साथ भारत सरकार के समझौते के खिलाफ इसाक सू और तुंगलांग मुइवा के नेतृत्व में एनएससीएन का गठन हुआ था। बाद में इससे अलग हो कर खापलांग ने अपना अलग गुट तैयार कर लिया। वह शांति समझौते के खिलाफ रहा है।

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'हमारे अपने नगालैंड को अब हम नई ऊंचाइयों पर ले कर जाएंगे।' -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम एक दूसरे को बेहतर समझ पाए हैं और दोनों पक्ष करीब आए हैं।' -टी. मुइवा, महासचिव, एनएससीएन (आइएम)

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Posted By: Rajesh Niranjan