महिला आरक्षण और परिसीमन बिल: पास होगा विधेयक या विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ेगा संसद का सत्र?
सरकार को विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन संशोधन और परिसीमन विधेयक पारित होने का विश्वास है। विपक्ष के विरोध ...और पढ़ें

लोकसभा

समय कम है?
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकार द्वारा संसद के विशेष सत्र में लाए जा रहे नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम और परिसीमन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तर्क-संघर्ष तय है, लेकिन विपक्ष की अब तक की तैयारी के बीच सरकार को विश्वास है कि वह निष्कंटक रूप से दोनों विधेयकों को पारित कराने में सफल हो जाएगी।
इसका आधार न सिर्फ छोटे दलों के साथ गृह मंत्री अमित शाह की पहले ही हो चुकी विस्तृत वार्ता है, बल्कि सत्ता पक्ष का मानना है कि जब संसद में दोनों विधेयकों की जानकारी विस्तार से साझा करते हुए सदन में आश्वस्त कर दिया जाएगा कि परिसीमन में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा, तब विपक्ष के सामने समर्थन न करने का कोई ठोस कारण नहीं होगा।
माना जा रहा है कि गुरुवार को खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी चर्चा में हिस्सा लेंगे जबकि शुक्रवार को गृहमंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब दे सकते हैं। नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक हो या परिसीमन विधेयक, यह दोनों ही संविधान संशोधन विधेयक हैं।
समझे आंकड़ों का खेल
विधायी नियमानुसार, इन्हें पारित कराने के लिए सदन के कम से कम दो तिहाई सदस्यों का मत या समर्थन आवश्यक है। वर्तमान में लोकसभा में सदस्यों की कुल संख्या 540 है, इसलिए इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को 360 सदस्यों का समर्थन चाहिए।
प्रत्यक्ष तौर पर यह नंबर गेम सरकार के उद्देश्यों में बाधक बना दिखता है, क्योंकि कांग्रेस के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों ने फिलहाल परिसीमन को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए विरोध को ऐलान कर दिया है। इसके बावजूद सरकार को विश्वास है कि दोनों विधेयक पारित होने में कोई बाधा नहीं आएगी।
दरअसल, महिला आरक्षण विधेयक को लेकर इसलिए भी कोई समस्या दिखाई नहीं पड़ रही, क्योंकि इसका स्पष्ट विरोध किसी दल ने नहीं किया है। ऐसा करना किसी भी पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह भी होना तय है। माना जा रहा है कि नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पूर्ण बहुमत के साथ पारित होना लगभग तय हैं। वहीं, तकरार के आसार सिर्फ परिसीमन विधेयक को लेकर हैं।
शाह की बैठक में क्या हुआ?
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने दावा किया कि जब संसद के बजट सत्र की पिछली बैठक चल रही थी, तभी गृह मंत्री शाह ने कई छोटे दलों के नेताओं-सदस्यों के साथ अलग-अलग बैठकें की थीं। उनके साथ न सिर्फ महिला आरक्षण विधेयक पर विस्तार से चर्चा की, बल्कि परिसीमन विधेयक को लेकर भी विश्वास में लिया है।
अब चूंकि प्रमुख विपक्षी दल आशंका जता रहे हैं तो सरकार की ओर से पूरी तैयारी है कि सदन में परिसीमन विधेयक के सभी पहलुओं को बहुत ही पारदर्शी ढंग से रखा जाएगा। तर्क सहित यह आश्वासन दिया जाएगा कि उत्तर भारत के राज्य हों, दक्षिण भारत के या उत्तर पूर्व के राज्य, सभी की सीटें समानुपातिक रूप से बढ़ाई जाएंगी।
2011 की जनगणना के आधार पर प्रस्तावित इस परिसीमन से किसी भी राज्य का किसी भी रूप में अहित नहीं होगा। सत्ता पक्ष का मानना है कि इसके बाद यकीनन विपक्ष भी परिसीमन विधेयक को पारित कराने में सहयोग करेगा।
