नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर ने दलील दी कि राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई थी। राज्य में कानून व्यवस्था के हालात को देखते हुए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई थी।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, अरूणाचल प्रदेश में संवैधानिक तंत्र के पूरी तरह के खत्म हो जाने के राज्यपाल के दावे के साथ ही उन्होंने राजभवन के बाहर खुलेआम गौहत्या का फोटो भी लगाया ताकि आपात स्थिति को सही तरीके से बताया जा सके।

ये खुलासा सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राज्यपाल के काउंसिल सत्यापाल जैन की तरफ से उस वक्त किया गया जब कोर्ट ने केन्द्र सरकार और राज्यपाल को राष्ट्रपति शासन लगाने का कारण पूछते हुए सभी जरुरी दस्तावेज मुहैया कराने के कहा। न्यायाधीश जेएस केहर की अध्यक्षता वाला संवैधानिक बेंच ने कहा कि चूंकि ये मामला बेहद गंभीर है इसलिए राज्यपाल की तरफ से राष्ट्रपति को भेजी गई सारी रिपोर्ट पेश करें।

कोर्ट ने ये भी कहा कि राष्ट्रपति शासन को लेकर कई रिपोर्ट राज्यपाल की तरफ से गृहमंत्रालय और राष्ट्रपति को भेजी गई लेकिन उन्होंने ये रिपोर्ट कांग्रेस पार्टी और उनके नेता जो कि इस केस में आवेदक है उनसे शेयर नहीं की गई है।

गौरतलब है कि अरूणाचल प्रदेश में पिछले साल 16 दिसंबर से राजनीतिक संकट है जब कांग्रेस के 21 विद्रोही विधायकों ने विधानसभाध्यक्ष नबाम रेबिया के महाभियोग के लिए एक अस्थायी स्थल पर भाजपा के 11 और दो निर्दलीय विधायकों के साथ हाथ मिला था। विधानसभाध्यक्ष ने इस कदम को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था।

राष्ट्रपति को राज्यपाल जेपी राजखोवा की तरफ से लिखे खत के मुताबिक, इस घटना के बाद राजभवन के सामने कई कांग्रेसी नेताओं ने मिथुन का बलिदान दिया। मिथुन को पहाड़ी मवेशी के तौर पर भी जाना जाता है। ये उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में गौजाति के तौर पर भी जाना जाता है।

पांच सदस्यीय बेंच ने सत्यपाल जैन से सभी रिपोर्ट को सील कवर में पेश करने को कहने के साथ ही केन्द्र और राजखोवा को नोटिस देते शुक्रवार तक राज्यपाल के फैसले को चुनौती देनेवाली याचिका पर जवाब देने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि, “ये मामला हमारे लिए प्राथमिक है और आप अपने जवाब शुक्रवार तक दाखिल करें और इस मुद्दे पर सुनवाई सोमवार को की जाएगी। जब तक हम सभी पक्षों की स्पष्ट राय नहीं ले लेते तब तक हम अपना इस बारे में कोई फैसला नहीं सुना सकते हैं।

Edited By: Rajesh Kumar