नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सहकारी बैंकों के जरिए कालाधन सफेद करने की कोशिश करने वाले बच नहीं सकेंगे। आयकर विभाग ऐसे लोगों पर शिकंजा कस सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सहकारी बैंक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जमाराशि स्वीकार नहीं कर सकते। इससे स्पष्ट हो गया है कि आठ नवंबर को नोटबंदी के फैसले के बाद जिन लोगों ने भी अघोषित धनराशि के 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट सहकारी बैंकों में जमा किए होंगे, अब उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि 16 दिसंबर की अधिसूचना में बदलाव किया गया है। अब सहकारी बैंक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत जमा स्वीकार करने के लिए प्राधिकृत नहीं हैं।

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सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब आयकर विभाग नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा हुए पुराने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट से संबंधित मामलों की छानबीन शुरु कर दी है। अब तक आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय सहित कई जांच एजेंसियां इस तरह के कई मामलों का पता लगा चुका है। साथ ही विभाग ने 9 नवंबर से 14 नवंबर 2016 के दौरान सहकारी बैंकों में लगभग 16000 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा हुए था। आयकर विभाग अब इन आंकड़ों का विश्लेषण कर रहा है।

असल में सरकार ने नोटबंदी के बाद अघोषित नकदी रखने वालों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना शुरु की है जिसके तहत कोई भी व्यक्ति अपनी अघोषित नकदी बैंक में जमा कर उस पर 50 प्रतिशत टैक्स दे सकता है। साथ ही उसे 25 प्रतिशत राशि बैंक में ही जमा करके रखनी होगी। हालांकि इस राशि पर सरकार उसे कोई ब्याज नहीं देगी। इस तरह टैक्स देने और निश्चित राशि जमा करने के बाद वह व्यक्ति सिर्फ 25 प्रतिशत धनराशि ही अपने खाते से निकाल सकेगा। सरकार की यह योजना 31 मार्च तक खुली है।

फिलहाल इस योजना के तहत किसी भी बैंक में जमा राशि का खुलासा किया जा सकता था लेकिन वित्त मंत्रालय ने अब स्पष्ट कर दिया है कि सहकारी बैंक इसके तहत जमाराशियां स्वीकार नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने 16 दिसंबर को जारी पीएमजीकेवाइ की अधिसूचना को संशोधित भी किया है।

इस योजना के तहत जो लोग भी अपने कालेधन का खुलासा करेंगे उन्हें पहले टैक्स का भुगतान करना होगा और उसके बाद वे बैंक से प्राप्त चालान के जरिए चार साल की जमा योजना का लाभ ले सकेंगे। सरकार ने इस योजना के तहत जिन बैंकों को अधिकृत किया है उन्हें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचना आय कर विभाग के पास भेजनी होगी। हालांकि बैंकों और रिजर्व बैंकों को इस संबंध में पूरी तरह गोपनीयता बरतनी होगी।

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Posted By: Manish Negi