नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सरकार की कोशिशें मुकाम तक पहुंची तो देश के संविदा कामगारों को भी समान काम के लिए वही वेतन, सुविधाएं मिल सकेंगी, जो नियमित कर्मचारियों को मिलती हैं। इसके लिए सरकार संविदा श्रमिक [विनियमन एवं उन्मूलन] कानून में संशोधन करने जा रही है। जबकि असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए देश भर में एक समान न्यूनतम मजदूरी पर वह अलग से काम कर रही है।

केंद्रीय श्रम एवं सेवायोजन मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे ने पिछले महीने देश भर में श्रमिक संगठनों, संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की दो दिनी हड़ताल को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के बाद शुक्रवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर समान न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए कानून में बदलाव तो लाने जा ही रही है, साथ ही संविदा कामगारों के मामले में भी गंभीर है। उसी क्रम में संविदा श्रमिक [विनियमन एवं उन्मूलन] अधिनियम-1970 में संशोधन का मसौदा तैयार हो चुका है। सरकार उस पर गंभीरता से विचार कर रही है। सभी पक्षकारों से बात भी हो रही है।

उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन का एक खास मकसद यह भी है कि संविदा कामगारों को भी वही वेतन, छुट्टियां व सामाजिक सुरक्षा मिल सके, जो उसी काम या फिर उस तरह के काम के लिए नियमित नियुक्ति वाले कामगारों को मिलती है। सरकार श्रम कानूनों के पूरी तरह अनुपालन और रोजगार की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्रम मंत्री ने कहा कि देशभर में श्रमिकों का शोषण हो रहा है। वह भी तब, जब केंद्र ने अपने स्तर पर कई नीतिगत बदलाव किए हैं। उन्होंने जोड़ा कि श्रम एवं सेवायोजन समवर्ती सूची में है। केंद्र नीतिगत मामलों में कदम उठा सकता है, लेकिन उसके मुताबिक राज्यों को भी कानूनों में बदलाव करना होगा। उनका अनुपालन कराना होगा।

उन्होंने कहा कि देशभर में समान न्यूनतम मजदूरी के लिए कानून में बदलाव का मसौदा तैयार है। उसे जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा। जबकि, कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत पेंशन राशि बढ़ाने के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। मकसद, मौजूदा पेंशन राशि को बढ़ाकर कम से कम एक हजार रुपए महीने करना है। अभी 27 प्रतिशत पेंशन धारकों को पांच सौ रुपए से भी कम, जबकि 56 प्रतिशत को पांच सौ से एक हजार रुपए के बीच मिल रही है।

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