नितिन प्रधान, नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था की विकास की रफ्तार को तेज करने की दिशा में सरकार एक बार फिर सार्वजनिक उपक्रमों पर फोकस कर रही है। निजी निवेश की सुस्त रफ्तार और मध्यावधि में इसके तेज होने की कम संभावनाओं को देखते हुए सरकार सार्वजनिक उपक्रमों पर पूरा भरोसा जता रही है।

बृहस्पतिवार को बजट में ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढांचे से लेकर सड़क निर्माण, बंदरगाह और रेलवे के विकास में सार्वजनिक उपक्रमों की महती हिस्सेदारी के संकेत दिये गए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि सरकार अब एक बार फिर से विकास के लिए होने वाले खर्च में इन कंपनियों की भागीदारी तलाश रही है। वर्तमान सरकार के बीते दो वर्ष से लेकर संप्रग के आखिरी दो-तीन वर्षो में अर्थव्यवस्था में निवेश के लिए पूरा जोर निजी कंपनियों पर रहा है।

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किंतु बीते दो साल का अनुभव बताता है कि निजी निवेश की रफ्तार काफी धीमी रही है। कंपनियां इस अवधि में नया निवेश करने से बचती रही हैं। ब्याज की ऊंची दरें और बाजार में मांग की कमी के चलते कंपनियों की आमदनी भी धीमी रफ्तार से बढ़ रही है। इसलिए विकास की योजनाओं को गति देने के लिए सरकार को अपने खजाने का मुंह खोलना पड़ा है। अगले वित्त वर्ष के बजट में भी सरकार ने समाज कल्याण से संबंधित कई नई घोषणाएं की हैं। लेकिन उनके वित्त पोषण के लिए सरकार को निवेश के नए स्त्रोतों की आवश्यकता है।

सार्वजनिक उपक्रमों की शीर्ष संस्था स्कोप यानी स्टैंडिंग कान्फ्रेंस आफ पब्लिक एंटरप्राइजेज के महानिदेशक डॉ. यूडी चौबे कहते हैं केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के ईटीएफ का प्रदर्शन बताता है कि इनमें आम जनता का भरोसा अभी भी बना हुआ है। सरकार भी मानती है कि सरकारी कंपनियां विकास की रफ्तार को बढ़ाने में सक्षम हैं। इसीलिए बजट में सरकार ने पीएसयू क्षेत्र पर भरोसा जताया है।

संभवत: यही वजह है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में सार्वजनिक उपक्रमों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए उनकी शेयर बाजार में लिस्टिंग पर जोर दिया है। यहां तक कि रेलवे के आइआरसीटीसी, आइआरएफसी और इरकॉन जैसे उपक्रमों को भी रेलवे उद्यमों के तौर पर सरकार शेयर बाजार में लिस्ट कराना चाहती है ताकि उनके कामकाज में पारदर्शिता बढ़े और आवश्यकता पड़ने पर ये कंपनियां बाजार से फंड जुटा सकें।

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बजट में सरकारी कंपनियों के एकीकरण और विलय संबंधी घोषणाओं से स्पष्ट है कि सरकार इन कंपनियों को मजबूती प्रदान करने के लिए इन्हें विशाल कंपनियों में तब्दील करने की नीति अपनाने जा रही है। फिलहाल तेल और गैस क्षेत्र में इसकी संभावनाएं देख रही है। लेकिन जानकार मान रहे हैं कि सरकार इस प्रक्रिया को स्टील, खनन जैसे क्षेत्रों के लिए भी अपना सकती है। ऐसा होता है तो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए प्रत्येक सेक्टर के लिए एक विशाल पीएसयू स्थापित करने में मदद मिलेगी।

Posted By: Sachin Bajpai

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