सुरेंद्र प्रसाद, नई दिल्ली। गेहूं की बंपर पैदावार के आंकड़ों को देखते हुए सरकारी खरीद करने वाली सरकारी एजेंसियों की सांसें फूलने लगी हैं। गेहूं की सरकारी खरीद अपने रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रही है। जबकि खरीद के लिए निर्धारित लक्ष्य पहले ही पूरा हो चुका है। सरकारी गोदामों में गेहूं का पुराना स्टॉक होने की वजह से भंडारण की बड़ी समस्या सामने आनी शुरु हो गई है। मौसम के बिगड़े मिजाज के चलते भी खुले में रखे गेहूं के खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

- पंजाब और उत्तर प्रदेश में खरीदे गये गेहूं के लिए खाली नहीं गोदाम

चालू फसल वर्ष 2017-18 में गेहूं की पैदावार पिछले साल के मुकाबले रिकार्डतोड़ 9.86 करोड़ टन हुई है। इसके चलते गेहूं उत्पादक सभी राज्यों में सरकारी खरीद में तेजी से इजाफा हो रहा है। खाद्य मंत्रालय के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 17 मई तक कुल 3.27 करोड़ टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो अब तक की सर्वाधिक है।

पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद जारी है। देश की प्रमुख अनाज मंडियों में दैनिक खरीद ढाई लाख टन के आसपास हो रही है। यही रफ्तार अगले 10 दिन जारी रही तो गेहूं की खरीद 3.50 करोड़ टन को भी पार कर सकती हैं।

पिछले साल गेहूं की कुल खरीद 3.08 करोड़ टन हुई थी, जबकि पिछले साल की इस तारीख तक 2.82 करोड़ टन गेहूं की खरीदी हो सकी थी। गेहूं खरीद की रफ्तार को देखते हुए सरकारी एजेंसियों की सांसें उखड़ने लगी है।

गोदामों की भारी कमी सुरक्षित भंडारण की राह में अवरोध बन सकती है। इसे लेकर केंद्र के साथ राज्य सरकारें भी मुश्किलों का सामना करने लगी हैं। उत्तर प्रदेश में तो हालात और भी खराब हैं, जहां न पर्याप्त भंडारण सुविधा है और न ही खरीद रुक रही है।

हरियाणा में पिछले साल के मुकाबले 12 लाख टन अधिक यानी 87 लाख टन से अधिक गेहूं की खरीद हुई है। हरियाणा में यह अब तक की सर्वाधिक खरीद है। पंजाब के गोदामों में 1.25 करोड़ टन गेहूं व चावल का पुराना स्टॉक जमा है। वहां गेहूं की कुल खरीद 1.30 करोड़ टन के आसपास पहुंचने वाली है।

उनकी मुश्किलें यह हैं कि गेहूं का इतना बड़ा स्टॉक रखा कहां जाएगा। खुले में तिरपाल से ढक कर रखा जाने वाला गेहूं सितंबर तक दूसरे राज्यों में पहुंचाया जा सकता है, लेकिन उसकी क्षमता 30 लाख टन के आसपास ही है। जबकि 4.7 लाख टन की क्षमता स्टील साइलोज के हैं।

उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे राज्य गेहूं के लिए उपभोक्ता राज्य नहीं है। इसके मद्देनजर पंजाब से गेहूं का स्टॉक मानसून के सक्रिय होने से पहले उपभोक्ता राज्यों में शिफ्ट करना होगा। इसके लिए रेलगाडि़यों का बंदोबस्त अभी से करना होगा। मानसून अपने निर्धारित समय एक जून के बजाय 25 मई को ही केरल के तट पर पहुंच जाएगा। मौसम के इस तेवर को भी समय से पहले भांपना जरूरी है।

By Bhupendra Singh