सरकार ने लॉन्च किया 'भारत टैक्सी', ओला-उबर को मिलेगी कड़ी टक्कर; ड्राइवर खुद होंगे मालिक
सरकार ने 'भारत टैक्सी' नामक एक नए सहकारी मॉडल की टैक्सी सेवा शुरू की है। गृह मंत्री अमित शाह ने ...और पढ़ें

सरकार ने लॉन्च किया भारत टैक्सी ओला-उबर को मिलेगी कड़ी टक्कर ड्राइवर खुद होंगे मालिक (फाइल फोटो)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकार ने देश में टैक्सी सेवा के क्षेत्र में एक नए सहकारी मॉडल की शुरुआत करते हुए 'भारत टैक्सी' को लांच कर दिया है। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में इस प्लेटफार्म की औपचारिक शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि यह सेवा न केवल ओला-उबर जैसी निजी कंपनियों को टक्कर देगी, बल्कि यात्रियों को सर्ज प्राइजिंग से राहत और ड्राइवरों को उनके श्रम का पूरा लाभ भी दिलाएगी।
क्या है भारत टैक्सी?
भारत टैक्सी देश का पहला सहकारी आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफार्म है, जिसे आठ सहकारी संस्थाओं एनसीडीसी, इफको, अमूल (जीसीएमएमएफ), कृभको, नेफेड, नाबार्ड, एनडीडीबी और एनसीईएल के सहयोग से तैयार किया गया है। इसे 'सहकार टैक्सी कोआपरेटिव लिमिटेड' संचालित करेगी, जिसका पंजीकरण छह जून 2025 को मल्टी स्टेट कोआपरेटिव सोसायटीज एक्ट के तहत हुआ था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने अमूल माडल का उदाहरण दिया और कहा कि जिस तरह 11 पशुपालकों से शुरू हुआ अमूल आज लाखों महिलाओं को आर्थिक मजबूती दे रहा है, उसी तरह भारत टैक्सी भी ड्राइवरों के आर्थिक जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी।
उन्होंने भरोसा जताया कि तीन वर्षों के भीतर यह सेवा कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारिका से कामाख्या तक पूरे देश में फैल जाएगी और टैक्सी चालकों के कल्याण का एक बड़ा माध्यम बनेगी। छोटे शहरों के भी सारथियों के लिए यह बहुत कल्याणकारी होगी।
ड्राइवर खुद होंगे मालिक
अमित शाह ने कहा कि भारत टैक्सी का सबसे बड़ा फर्क इसका मालिकाना ढांचा है। यहां ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि मालिक भी होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक 100 रुपये की कमाई में से 80 रुपये सीधे ड्राइवर के खाते में जाएंगे और शेष 20 रुपये भी सहकारी ढांचे के तहत उन्हीं की हिस्सेदारी माने जाएंगे।
भारत टैक्सी का उद्देश्य पूंजी बढ़ाना नहीं है, बल्कि सारथी भाइयों और दीदियों को मुनाफा बढ़ाना है। निजी कंपनियों की तरह इसमें किसी बाहरी निवेशक का मुनाफा नहीं होगा।भारत टैक्सी पूरी तरह सर्ज-फ्री माडल पर चलेगी। यानी मांग बढ़ने पर यात्रियों से मनमाना किराया नहीं वसूला जाएगा।
इससे आम यात्रियों को राहत मिलेगी और किराया अपेक्षाकृत कम रहेगा। प्लेटफार्म के माध्यम से कार, आटो-रिक्शा और दोपहिया वाहन बुक किए जा सकेंगे। अमित शाह ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के दौरान भारत टैक्सी की सफलता को देखते हुए प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म्स को भी अपने कमीशन और ऑफर्स में बदलाव करने पड़े हैं।
ड्राइवरों को कितनी हो रही कमाई?
हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि ड्राइवरों को मालिकाना हक देना ऐसा कदम है, जो अन्य कोई राइड-हेलिंग कंपनी नहीं कर सकती। दिसंबर 2025 में शुरू हुए पायलट ऑपरेशन के बाद अब तक तीन लाख से अधिक ड्राइवर इस प्लेटफार्म से जुड़ चुके हैं। दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में रोजाना दस हजार से ज्यादा राइड पूरी हो रही हैं और करीब 10 करोड़ रुपये सीधे ड्राइवरों को वितरित किए जा चुके हैं।
भारत टैक्सी ड्राइवरों को 'सारथी' नाम दिया गया है। इनके सामाजिक सुरक्षा की भी व्यवस्था है। इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा रिटायरमेंट सेविंग्स और सहायता केंद्रों की व्यवस्था भी की गई है। दिल्ली में सात स्थानों पर सपोर्ट सेंटर पहले से काम कर रहे हैं।
