नीलू रंजन, नई दिल्ली। टीकाकरण के तीसरे चरण में प्राथमिकता समूह वाले बुजुर्ग थोड़े पीछे छूटते जा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े ही कोरोना से सबसे अधिक मरने वाले 45 साल से अधिक उम्र के लोगों के टीकाकरण की रफ्तार में आ रही कमी को बयां कर रहे हैं। इस वर्ग के साथ-साथ हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स भी प्राथमिकता वाले समूह में शामिल हैं, जिनके लिए केंद्र सरकार ने मुफ्त टीकाकरण जारी रखने का एलान किया है।

वैसे तो स्वास्थ्य मंत्रालय का कोई भी अधिकारी प्राथमिकता वाले समूहों के लिए वैक्सीन की कमी की बात मानने को तैयार नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि राज्यों और निजी क्षेत्र के लिए 50 फीसद डोज रिजर्व किए जाने के कारण केंद्रीय कोटे में वैक्सीन की सप्लाई में कमी आनी शुरू हो गई है। राज्यों और निजी क्षेत्र को 18 से 44 साल आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए वैक्सीन दी जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राज्यों के पास वैक्सीन की केवल 75 लाख डोज ही बची हैं और 48 लाख डोज तीन-चार दिन में उपलब्ध हो जाएंगी। ध्यान देने की बात है कि ये वैक्सीन उस प्राथमिकता वाले समूह के लिए है, जिनके लिए कोरोना सबसे घातक साबित हो रहा है।

लगभग 28 करोड़ लोग 45 साल से अधिक उम्र वाले समूह में

सरकार के अनुमान के मुताबिक प्राथमिकता वाले समूहों में लगभग 30 करोड़ लोग आते हैं। इनमें से लगभग 28 करोड़ लोग 45 साल से अधिक उम्र वाले समूह में हैं। कोरोना से होने वाली मृत्युदर में 80 फीसद हिस्सेदारी 45 साल से अधिक उम्र के लोगों की ही है। जाहिर है इस समूह में टीकाकरण की रफ्तार धीमी होना चिंता की बात है। तीन मई को देश में वैक्सीन की कुल 17,08,390 डोज दी गई। इनमें से 8,70,047 लोगों को दूसरी और 8,38,343 लोगों को ही पहली डोज दी गई है। इनमें से भी पहली डोज लेने वाले 2,17,616 लोग 18 से 44 साल की उम्र के हैं। यानी प्राथमिकता वाले समूहों के लगभग छह लाख लोगों को ही वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा सकी।

प्राथमिकता वाले समूहों में से 13 करोड़ से कम लोगों को पहली डोज दी गई 

प्राथमिकता वाले समूहों में से अभी तीन करोड़ लोगों को भी वैक्सीन की दोनों डोज नहीं लग पाई है, जो उनकी कुल संख्या की 10 फीसद से भी कम है। प्राथमिकता वाले समूहों में से 13 करोड़ से कम लोगों को पहली डोज दी गई है यानी अभी इस समूह के 50 फीसद से अधिक लोगों को पहली और 90 फीसद से अधिक को दूसरी डोज दी जानी है। टीके की मौजूदा रफ्तार से निकट भविष्य में इन सबको टीका लगा पाना मुश्किल दिख रहा है।

प्राथमिकता वाले समूह में 45 साल से अधिक उम्र लोगों में टीके की रफ्तार धीमी होने के पीछे वैक्सीन की सप्लाई कम होने के साथ-साथ टीकाकरण के नियमों में बदलाव को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। एक मई से सभी निजी टीकाकरण केंद्रों को बंद कर दिया गया है, जहां प्राथमिकता वाले समूह को 250 रुपये में टीके लग रहे थे। अब ये टीके सिर्फ सरकारी टीकाकरण केंद्रों में लगाए जाएंगे। इसमें बुजुर्गों के लिए सरकारी सेंटरों को ढूंढने और कई राज्य में लगे लाकडाउन के कारण उन तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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