जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मी टू अभियान में यौन उत्पीड़न के एक के बाद एक हो रहे खुलासे के बाद सरकार ने ऐसे मामलों की जांच और शिकायतों को निपटाने के लिए कानूनी तंत्र मजबूत करने के लिए सेवानिवृत जजों की कमेटी बनाने का फैसला किया है। एक दो दिन में सरकार चार सेवानिवृत न्यायाधीशों और एक वरिष्ठ वकील की कमेटी गठित करेगी जो कि मी टू मामलों की जांच और कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के तंत्र पर विचार करेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मी टू के बढ़ते अभियान और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए जाने माने कानूनविदों की कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने शुक्रवार को मी - टू अभियान के तहत की जा रही शिकायतों पर कहा कि वह सभी पर विश्वास करती हैं और उनकी पीड़ा से इत्तफाक रखती हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बारे मे बोल रहे हैं वे इसलिए नहीं बोल रहे कि उन्हें न्याय चाहिए बल्कि वो इसलिए बोल रहे हैं कि क्योंकि बहुत सालों से एक बोझ उनके मन पर है।

एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि 'किसी भी औरत को मुंह से शर्मिदा करो या छू कर शर्मिदा करो, वह औरत कभी उसे भूलती नहीं। चाहें वह 80 साल को हो।' और ये सब सालों साल से इंतजार कर रहे हैं कि उनमें हिम्मत आ जाए और अब उनमें हिम्मत आ गई है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस बावत चार सेवानिवृत न्यायाधीशों और एक न्यायमित्र जो कि वरिष्ठ वकील होगा, की कमेटी बनाने पर विचार कर रहा है। ये कमेटी वर्मा कमेटी की तरह मामले पर स्वतंत्र सुनवाई करेगी और अंत मे न्यायाधीश अपनी रिपोर्ट देंगे।

मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि कमेटी शिकायतों की अलग अलग सुनवाई नहीं करेगी बल्कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने का तंत्र बनाने और मौजूद तंत्र को और मजबूत करने के मुद्दे पर विचार करेगी। इस दौरान कमेटी केस स्टडी के तौर पर कुछ शिकायतों की भी जांच करेगी। सूत्र बताते हैं कि एक दो दिन में कमेटी का गठन हो जाएगा।

इससे पहले भी महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने महिलाओं से यौन उत्पीड़न की शिकायतें आन लाइन मंत्रालय की वेबसाइट पर या ई बाक्स व शी बाक्स मे करने को कहा था। उन्होंने कहा था कि ये एक अपराध है और इसकी शिकायत की जानी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि आन लाइन आने वाली शिकायतों को निपटाने और जांचने का पूरा तंत्र है और उस पर उसी तरह काम होता है। मंत्रालय का कहना है कि भारत सरकार की यौन उत्पीड़न शिकायतों के प्रति जीरो टालरेंस नीति है।

कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने का कानून लागू किया गया है। इसके तहत आंतरिक जांच कमेटी बनाना कानूनन जरूरी है और ये कमेटी यौन उत्पीड़न की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करे। मंत्रालय ने पीडि़तों से कहा है कि वे आन लाइन व अन्य तरीकों से अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की शिकायत कर सकती हैं और मंत्रालय इसमें उन्हें सभी जरूरी मदद करेगा।

महिलाओं द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत के पूरी दुनिया में फैले मी टू अभियान की शुरुआत भारत में अभिनेत्री तनु श्री दत्ता ने जानेमाने अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर की। इसके बाद अभिनेता आलोक नाथ और बहुत से लोगों के नाम सामने आये। इसकी आंच भारत सरकार के मंत्री एमजे अकबर तक भी पहुंची है। अकबर पर संपादक होने के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गऐ हैं। 
 

 

Posted By: Prateek Kumar