यूपीआई विवाद: अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे झुक गई सरकार, विपक्ष का केंद्र पर अब तक का सबसे तीखा हमला विपक्ष
विपक्षी दलों का दावा है कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के ...और पढ़ें

अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे झुक गई सरकार- विपक्ष (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
कहा, यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने से अधिकांश चीजें महंगी हो जाएंगी
राहुल गांधी ने यूपीआई भुगतान पर फीस लगाने का फैसला वापस लेने की मांग की
पीटीआई, नई दिल्ली। विपक्ष ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार ने यूपीआई के लिए एमडीआर फ्रेमवर्क लाकर अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे घुटने टेक दिए हैं।
विपक्षी दलों का दावा है कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के तहत 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने से अधिकांश चीजों की कीमतें बढ़ जाएंगी। कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को "मोदी टैक्स" करार दिया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने दंडवत करने और अमेरिका को भारी रकम देने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने सरकार से यूपीआई भुगतान पर फीस लगाने का फैसला वापस लेने की मांग की।
एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में नेता विपक्ष ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वह अमेरिका के सामने झुकना बंद करें और हिम्मत दिखाएं। उन्होंने यूपीआई पर टैक्स लगाकर और अमेरिका को भारी रकम देकर हर भारतीय पर टैक्स का बोझ डाला है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या एमडीआर की घोषणा इसलिए की गई ताकि अमेरिकी कार्ड कंपनियां यूपीआई से मुकाबला कर सकें।
तृणमूल सांसद सौगत राय ने कहा कि यूपीआइ भुगतान पर फीस लगाने के प्रस्ताव का कांग्रेस ने विरोध किया है। यह सही भी है, क्योंकि इससे अधिकांश वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाएंगी। हालांकि, ग्राहक पर शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन दुकानदार को चार्ज देना होगा। इसीलिए राहुल गांधी ने इसका विरोध किया है। उनके रुख का मैं समर्थन करता हूं।
राजद सांसद मनोज झा ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। कहा कि यह उनका अपना निर्णय नहीं है। अपनी बुद्धि से लिया गया निर्णय नहीं है। जब हम अमेरिकी साम्राज्यवाद की बात करते हैं, तो यह इसके आगे झुकने जैसा है। पहले उन्होंने लोगों को डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ाया। अब देखिए कि इसका कितनी चीजों पर और किन तरीकों से असर पड़ेगा।
भाकपा महासचिव डी राजा ने सरकार से इस "जनविरोधी निर्णय" को वापस लेने की मांग की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि यूपीआइ सार्वजनिक भुगतान प्रणाली है। इसके उपयोग पर शुल्क लगाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
सरकार दावा कर रही है कि ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा, लेकिन अनुभव बताता है कि दुकानदार हमेशा उपभोक्ता पर नए खर्च डालने के तरीके ढूंढ लेते हैं।
