नई दिल्ली (नेशनल ब्यूरो)। गन्ना किसानों का बढ़ता बकाया गंभीर समस्या बनती जा रही है। घरेलू चीनी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग न होने से निर्यात की संभावनाएं क्षीण हो गई हैं। उस पर भी सरकार ने चीनी निर्यात पर पिछले साल से 20 फीसद का शुल्क लगा रखा है। चीनी निर्यात को शुल्क मुक्त करने को लेकर खाद्य मंत्रालय के प्रस्तावों को वित्त मंत्रालय ने पहले ही खारिज कर दिया है। अब सरकार इसे हटाने पर दोबारा विचार कर रही है।

जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी का भाव इतना नीचे आ गया है कि घरेलू चीनी निर्यात शुल्क के बगैर भी महंगी साबित होगी। चीनी मिल मालिक इसके लिए भी निर्यात प्रोत्साहन की मांग कर रहे हैं। चीनी का भाव नीचे आने की वजह से मिलों की समस्याएं दिनों दिन गहराती जा रही हैं।

31 जनवरी को ही गन्ने का बकाया बढ़कर 14 हजार करोड़ रुपये था। उद्योग संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक मार्च तक यह बढ़कर 22 हजार करोड़ रुपये की सीमा पार कर सकता है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक उनकी ओर से वित्त मंत्रालय को एक प्रस्ताव 15 दिन पहले ही भेजा गया था। उसके जवाब में कहा गया कि निर्यात शुल्क हटाने से जितने राजस्व का घाटा होगा, उसकी भरपाई कैसे होगी? लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को दोबारा भेजा है। सूत्रों का कहना है कि इसे स्वीकार कर लिया जाएगा।

Posted By: Nancy Bajpai

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